क्यों नहीं मिला गैस पीड़ितों की अगली पीढ़ी को यूनियन कार्बाइड व डाव केमिकल से मुआवजा पाने का हक..


स्टोरी हाइलाइट्स

गैस पीड़ितों के 37 साल -37 सवाल की मुहीम के 35वे दिन पर यूनियन कार्बाइड गैस हादसे से प्रभावित माता पिता से पैदा हुए विकलांग बच्चों ने राज्य और केंद्र सरकार से जवाब माँगा।

यूनियन कार्बाइड के जहरों से पीड़ित माता पिताओ के जन्मजात विकृति के साथ पैदा हो रहे बच्चों ने प्रधानमन्त्री और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री से आग्रह किया की यूनियन कार्बाइड/डाव केमिकल से उनके स्वास्थ्य को पहुंची क्षति के कानूनी अधिकार दिलाए| 

बच्चों ने "हम होंगें कामयाब" के गीत इस आशा से गाए कि उनकी सालों पुरानी मांगों को सुना जाए ताकि उन्हें इज्जत की जिंदगी मिल सके| गैस पीड़ितों को जन्मे बच्चों में स्वास्थ्य को पहुंची क्षति के वैज्ञानिक सबूत, न्यायिक स्वीकृति और कानूनी सिद्धांतों के समर्थन होने के बावजूद भी केंद्र और राज्य सरकार, इस बात को नजरअंदाज क्यों कर रही है|  

गैस पीड़ितों के 37 साल -37 सवाल की मुहीम के 35वे दिन पर यूनियन कार्बाइड गैस हादसे से प्रभावित माता पिता से पैदा हुए विकलांग बच्चों ने राज्य और केंद्र सरकार से जवाब माँगा। उन्होंने पूछा, "जब इस बात के वैज्ञानिक सबूत हैं कि यूनियन कार्बाइड की जहरीली गैसों की वजह से गैस काण्ड के बाद पैदा हुए पीड़ितों के बच्चों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा है | तो गैस पीड़ितों की अगली पीढ़ी को यूनियन कार्बाइड व डाव केमिकल से मुआवजा पाने का कानूनी हक़ दिलाने के लिए आज तक केंद्र व प्रदेश की सरकारों ने कोई कदम क्यों नहीं उठाया है ? 

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित शोध पत्रों में यूनियन कार्बाइड की जहरीली गैसों से प्रभावित माता पिता के जन्मे बच्चों में अनुवांशिक (जीन टॉक्सिक) विकार पाए गए है | 

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के अध्ययन में हादसे के 5 साल बाद तक जहरीले गैस के संपर्क में आने वाली महिलाओं में गर्भपात का दर बहुत बड़ा पाया गया है | 

राष्ट्रीय पर्यावरणीय अनुशंधान संस्था (NIREH) की 2016 के गैस पीड़ित माताओं के बच्चों में अपीडित माताओं के बच्चों के मुकाबले 7 गुना ज्यादा जन्मजात विकृतियां बताने वाले एक अध्ययन के नतीजे को प्रकाशित नहीं करने का फैसला किया | हालांकि इस अध्ययन के निष्कर्षों का इस्तेमाल यूनियन कार्बाइड/डाव केमिकल से अतिरिक्त मुआवजे के लिए दायर सुधार याचिका में किया जाना था पर भारत सरकार की शोध संस्था के नीतजो को ही दबा दिया गया है|

सर्वोच्च न्यायालय के 3 अक्टूबर 1991 के फैसले ने निर्देश दिया था की गैस पीड़ित माता-पिता को पैदा हुए कम से कम 1 लाख बच्चों को चिकित्सीय बीमा कवरेज प्रदान किया जाए | आज तक एक भी बच्चे को बीमा नहीं कराया गया है | 

गैस पीड़ित माता-पिता को पैदा हुई 10 वर्षीय पूनम अहिरवार जन्मजात विकृति से पीड़ित है | वह ERBS पाल्सी से पीड़ित है जिससे उसकी गर्दन और हाथ की गति प्रतिबंधित है | इसी तरह 19 वर्षीय मोहम्मद जैद भी जन्मजात विकृति (CTEV) के साथ पैदा हुए जिसकी वजह से पूर्ण रूप से शारीरिक विकलांग है | दोनों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से आग्रह किया की वह उनके मुआवजे की कानूनी अधिकारों को पूरा करे ताकि वह सम्मानजनक जीवन जी सके |  

2018 में गैस काण्ड के लिए अतिरिक्त मुआवजे के लिए दायर सुधार याचिका पर बहस करने वाले के सर्वोच्च न्यायालय के वकील ने गैस पीड़ितों की सन्तानो पर गैस काण्ड के असर पर जानकारी और सबूत मांगे | 

यह सबूत होने के बावजूद राज्य और केंद्र सरकार ने इस जानकारी को सर्वोच्च न्यायालय में आज तक साझा नहीं किया है | यह एक ज्वलंत उदाहरण है की केंद्र तथा प्रदेश सरकारों की यूनियन कार्बाइड और उसके वर्तमान मालिक डाव केमिकल के साथ सांठगांठ आज भी जारी है|

भोपाल हादसा- 37 साल पर 37 सवाल की मुहिम के जरिए संगठन गैस पीड़ितों को मुआवज़ा, दोषियों को सज़ा, इलाज, रोजगार और समाजिक पुनर्वास तथा प्रदूषित जमीन के ज़हर सफाई जैसे जवलंत मुद्दों पर ध्यान खीच रहे हैं|