भोपाल: राज्य सरकार ने श्रम विभाग के माध्यम से न्यूनतम वेतन मप्र नियम 1958 तथा मप्र मजदूरी भुगतान नियम 1962 को खत्म कर नया एकजाई मप्र मजदूरी संहिता नियम 2026 जारी किया है जोकि 15 जून के बाद पूरे प्रदेश में प्रभावशील किया जायेगा। नई संहिता के अनुसार, अब न्यूनतम वेतन नये मापदण्डों के आधार पर तय की जायेगी जिसमें शामिल होगा-एक, श्रमिक वर्ग परिवार जिसमें कमाने वाले श्रमिक के अतिरिक्त, उसकी पत्नी/पति और दो बच्चे शामिल रहेंगे जो तीन वयस्क उपभोग इकाईयों के समान होंगे। दो, प्रति दिन प्रति उपभोग इकाई हेतु 2700 कैलोरी की शुध्द खपत।

तीन, प्रति श्रमिक वर्ग परिवार को प्रति वर्ष 66 मीटर कपड़ा, आवासीय किराया व्यय जो भोजन और वस्त्र व्यय का अधिकतम 10 प्रतिशत होगा। चार, ईंधन, बिजली और अन्य विविध व्यय मदें जो भोजन और वस्त्र व्यय का अधिकतम 20 प्रतिशत होगा। पांच, बच्चों की शिक्षा का व्यय, चिकित्सा जरुरत, मनोरंजन और अन्य आकस्मिक व्यय जो भोजन और वस्त्र व्यय का अधिकतम 25 प्रतिशत होगा। यह न्यूनतम वेतन भौगोलिक क्षेत्र या अकुशल, अर्ध कुशल, कुशल और उच्च कुशल श्रेणियों के अंतर्गत कार्य करने के लिये आवश्यक कौशल का स्तर पर वर्क कान्टिजेंट की भौतिक परिस्थितियों के आधार पर तय होगी। 

किसी भी प्रतिष्ठान में किसी भी कर्मचारी से एक सप्ताह में 48 घण्टें से अधिक समय तक काम करने की अनुमति नहीं होगी। छह दिवसीय सप्ताह में रविवार अवकाश का दिन होगा जबकि इससे कम अवधि के सप्ताह में शनिवार और रविवार को अवकाश में शामिल किया जायेगा। अकुशल श्रमिकों में बेलदार, ग्वाला सहित कुल 116 श्रमिक शामिल किये गये हैं जबकि अर्धकुशल श्रमिक में चौकीदार, मोची, खेतिहर सहित कुल 134 श्रमिक सम्मिलित किये गये हैं। इसी प्रकार, कुशल श्रमिकों में शिल्पकार, लुहार सहित कुल 323 कर्मचारी शामिल किये गये हैं जबकि उच्च कुशल श्रमिक में वरिष्ठ मेकेनिक, प्लम्बर सहित कुल 113 कर्मचारी सम्मिलित किये गये हैं।

बनाया नया औद्योगिक सम्बंध नियम :

राज्य सरकार ने श्रम विभाग के माध्यम से मप्र औद्योगिक विवाद नियम 1957, मप्र व्यवसाय संघ विनियम 1961 तथा मप्र औद्योगिक नियोजन स्थाई आदेश नियम 1963 को खत्म कर नया एकजाई मप्र औद्योगिक संबंध नियम 2026 जारी किया है तथा यह भी आगामी 15 जून 2026 के बाद पूरे प्रदेश में प्रभावशील किया जायेगा। नये नियमों के अनुसार, अब ट्रेड यूनियन के गठन हेतु ग्रामीण कर्मकारों से बीस रुपये प्रतिवर्ष, असंगठित क्षेत्र के कर्मकारों से तीस रुपये प्रति वर्ष और अन्य मामलों के कर्मकारों से 50 रुपये प्रति वर्ष शुल्क लिया जा सकेगा।