वनाधिकार पत्र देने में हुआ घोटाला, जांच रिपोर्ट तलब की


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स्टोरी हाइलाइट्स

भोपाल स्थित वन मुख्यालय की भू-अभिलेख शाखा के पीसीसीएफ मनोज अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट एवं केंद्र के जनजातीय कार्य विभाग के निर्देश पर संचालक आदिमजाति क्षेत्रीय विकास योजनायें तथा सीसीएफ शिवपुरी वन वृत्त को पिछले माह पत्र लिख कर कहा था कि गूगल इमेजनरी का अध्ययन करने पर पाया गया है कि वर्ष 2004-05 की स्थिति में आसपास के क्षेत्रों में मात्र 12 से 15 झोपडिय़ां बनी हुई थीं..!!

भोपाल: प्रदेश के शिवपुरी जिले के वन क्षेत्र में वनाधिकार कानून के तहत सुगरा जाति के आदिवासियों को पट्टे देने में घोटाला सामने आया है तथा वन विभाग के एसीएस अशोक बर्णमाल ने शिवपुरी कलेक्टर एवं वहां के डीएफओ से संयुक्त जांच रिपोर्ट तलब की है।

दरअसल भोपाल स्थित वन मुख्यालय की भू-अभिलेख शाखा के पीसीसीएफ मनोज अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट एवं केंद्र के जनजातीय कार्य विभाग के निर्देश पर संचालक आदिमजाति क्षेत्रीय विकास योजनायें तथा सीसीएफ शिवपुरी वन वृत्त को पिछले माह पत्र लिख कर कहा था कि गूगल इमेजनरी का अध्ययन करने पर पाया गया है कि वर्ष 2004-05 की स्थिति में आसपास के क्षेत्रों में मात्र 12 से 15 झोपडिय़ां बनी हुई थीं। 

मौके पर बाउण्ड्री वॉल बनी हुई है तथा उसके अंदर की भूमि (एक आश्रम बना हुआ है) पर वर्ष 2015 में व्यक्ति विशेष के नाम से सामुदायिक वन अधिकार दिया गया है। बाउण्ड्री वॉल होने के कारण जनसामान्य के लिये आवाजाही नहीं है। दिये गये सामुदायिक वन अधिकार के पत्रक पर जिस डीएफओ शिवपुरी के हस्ताक्षर हैं, वे वर्ष 2011 से वर्ष 2013 तक ही शिवपुरी वनमंडल में पदस्थ रहे हैं। जबकि उक्त सामुदायिक वन अधिकार का आवंटन वर्ष 2015 का है जिससे प्रतीत होता है कि उक्त सामुदायिक वन अधिकार त्रुटिपूर्ण एवं नियमों के विपरीत आवंटित किया गया है। 

इसके अलावा, वर्ष 2017 में बिना वन अधिकार पत्र आवंटन पर 30 से अधिरक लोगों को इंदिरा आवास स्वीकृत किये गये हैं जोकि वन संरक्षण अधिनियम 1980 एवं वन अधिकार अधिनियम 2006 का स्पष्ट उल्लंघन है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2017 में 63 से अधिक अपात्र लोगों को वन अधिकार पत्र वितरित किये गये हैं जोकि वन अधिकार एक्ट 2006 का स्पष्ट उल्लंघन है। पत्र में जांच कर नियम विरुध्द बांटे गे वन अधिकार पत्र निरस्त करने के निर्देश दिये गये हैं। इस मामले को एसीएस बर्णमाल ने अब गंभीरता से लेते हुये शिवपुरी कलेक्टर एवं वहां के डीएफओ से संयुक्त जांच रिपोर्ट तलब की है जिससे इस प्रकरण का उचित रुप से निराकरण हो सके।