AI Summit: दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने अक समिट में शर्टलेस विरोध प्रदर्शन के मामले में गिरफ्तार इंडियन यूथ कांग्रेस के नौ कार्यकर्ताओं को जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि यह प्रदर्शन सिर्फ सरकार की आलोचना करने का तरीका था। इसलिए मुकदमा शुरू होने से पहले किसी को जेल में रखना कानून के मूल सिद्धांतों के खिलाफ होगा।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि प्रदर्शन के समय लगाए गए नारे भड़काऊ नहीं थे। उनमें कोई धार्मिक या क्षेत्रीय रंग नहीं था। किसी तरह की तोड़फोड़ या लोगों को डराने का भी कोई सबूत नहीं मिला। कोर्ट ने यह भी बताया कि प्रदर्शन करने वालों को सुरक्षा के साथ बाहर ले जाया गया था।
कोर्ट ने कहा- आजादी अधिकार है और जेल केवल खास स्थिति में होनी चाहिए। अगर ट्रायल से पहले किसी को बिना जरूरी कारण के जेल में रखा जाए तो यह बिना सजा तय हुए ही सजा देने जैसा होगा।
पटियाला हाउस कोर्ट के न्यायिक मजिस्ट्रेट (फर्स्ट क्लास) रवि ने कृष्ण हरि, नरसिंह यादव, कुंदन कुमार यादव, अजय कुमार सिंह, जितेंद्र सिंह यादव, राजा गुर्जर, अजय कुमार विमल उर्फ बंटू, सौरभ सिंह और अरबाज खान की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया।
पुलिस ने जमानत का विरोध किया
दिल्ली पुलिस ने कहा कि आरोपी, जो इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता हैं, 20 फरवरी को एआई समिट के स्थान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीरों वाली सफेद टी-शर्ट पहनकर या हाथ में लेकर पहुंचे थे। इन टी-शर्ट्स पर इंडिया-यूएस ट्रेड डील, एपस्टीन फाइल्स और पीएम इज कम्प्रोमाइज्ड जैसे नारे लिखे थे।पुलिस ने आरोप लगाया कि वहां अंतरराष्ट्रीय मीडिया मौजूद थी और उसी दौरान नारेबाजी की गई। जब पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की हुई, जिससे कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए। पुलिस का कहना है कि इसके मेडिकल सबूत भी मौजूद हैं।