तिल को आयुर्वेद में औषधि माना गया है
आयुर्वेद में भी तिल को औषधि के रूप में काफी फायदेमंद माना गया है। तिल पर अब तक कई अध्ययन हुए हैं जिनमें यह पाया गया है कि तिल का सेवन अगर सुबह उठकर खाली पेट किया जाए तो यह सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद हो सकता है। फैटी एसिड, फाइबर, प्रोटीन और कैल्शियम से भरपूर तिल सेहत के साथ-साथ त्वचा और बालों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है।
तिल खाने के फायदे
1. कब्ज के लिए :- काले तिल में फाइबर और अनसैचुरेटेड फैटी एसिड की उच्च मात्रा होती है जो कब्ज की समस्या से राहत दिलाने में मदद करती है। तिल में पाया जाने वाला तेल आंतों को चिकनाई देने में मदद करता है।
2. दांतों के लिए :- तिल में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला तेल दांतों में जमी मैल को दूर करता है। दांतों की सड़न और मसूढ़ों की बीमारी से भी बचाता है। भुने हुए तिल को अगर सुबह खाली पेट चबाया जाए तो इससे दांत और मसूड़े मजबूत होते हैं और सांसों की दुर्गंध की समस्या भी दूर होती है।
3. हड्डियों के लिए :- तिल हड्डियों को मजबूत बनाने में भी मदद करता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि तिल में आहार प्रोटीन और अमीनो एसिड होते हैं जो हड्डियों के विकास को बढ़ावा देते हैं और हड्डियों को कमजोर होने से रोकते हैं जिससे गठिया जैसी बीमारियां हो सकती हैं।
4. खून बनाना :- तिल खाने से हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ जाती है। अगर किसी व्यक्ति को खून की कमी है तो उसे भी तिल खाना चाहिए क्योंकि तिल में आयरन भी होता है जो एनीमिया की समस्या को दूर करता है।
5. त्वचा और बालों के लिए :- एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर तिल चेहरे पर उम्र के निशानों को कम करता है और तिल का तेल त्वचा को मुलायम बनाता है। इसके अलावा तिल, जो ओमेगा फैटी एसिड से भरपूर होते हैं, मूड से बालों को मजबूत कर बालों की ग्रोथ को भी बढ़ाते हैं।