भोपाल: राज्य के दो वन वृत्तों शहडोल में 42 तथा छिन्दवाड़ा में 4 वन अपराध न्यायालय से वापस लिये गये हैं। दरअसल राज्यपाल मंगु भाई पटेल ने राजभवन में बनाये अपने जनजातीय प्रकोष्ठ के माध्यम से आदिवासियों के विरुध्द वन अधिनियम 1927 तथा वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत दर्ज प्रकरण वापस लिये जाने के वन विभाग को निर्देश दिये थे। वन विभाग ने पिछले दस सालों में 12 वन वृत्तों में दर्ज प्रकरणों की जानकारी एकत्रित की जिसमें ज्ञात हुआ कि न्यायालय में प्रस्तुत ऐसे प्रकरणों की कुल संख्या 3 हजार 174 है जिसमें से 124 प्रकरण वापस लिये जा सकते हैं।

लेकिन अभी तक वन विभाग मात्र 46 प्रकरण ही न्यायालय से वापस ले सका है। शहडोल वनवृत्त के वनमंडल दक्षिण शहडोल के 42 तथा छिन्दवाड़ा वन वृत्त के पूर्व छिन्दवाड़ा वनमंडल के 4 प्रकरण ही न्यायालय से वापस हो सके हैं। अभी छतरपुर वन वृत्त के छतरपुर वनमंडल के 6, पन्ना टाइगर रिजर्व के 12, छिन्दवाड़ा वन वृत्त के पाण्ढर्ना वनमंडल के 4, सागर वन वृत्त के दमोह वनमंडल के 8, इंदौर वन वृत्त के धार वनमंडल के 20, ग्वालियर वन वृत्त के दतिया वनमंडल का एक एवं श्योपुर वन मंडल के 8, बैतूल वन वृत्त के उत्तर बैतूल वनमंडल के 2, बालाघाट वन वृत्त के उत्तर बालाघाट वनमंडल के 2, सिवनी वन वृत्त के दक्षिण सिवनी वनमंडल के 2, उत्तर सिवनी वनमंडल के 7 तथा पेंच टाइगर रिजर्व के 6 प्रकरण न्यायालय से वापस नहीं हो सके हैं। जबलपुर वन वृत्त के पश्चिम मंडला वनमंडल में आदिवासियों के खिलाफ सर्वाधिक  1 हजार 554 प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत हैं परन्तु इनमें से एक भी प्रकरण वापसी हेतु योग्य नहीं पाया गया है। भोपाल वन वृत्त के भोपाल वनमंडल में दर्ज 4, ओबेदुल्लागंज वनमंडल में दर्ज 118, विदिशा वनमंडल में दर्ज 7 तथा राजगढ़ वनमंडल में दर्ज 4 प्रकरण भी न्यायालय से वापस लेने हेतु योग्य नहीं पाये गये हैं।