उदयपुर में कन्हैयालाल की बर्बर हत्या के लिए नुपुर के बयान को जिम्मेदार बताने वाले सुप्रीम कोर्ट के जजों का विरोध बढ़ता जा रहा है। फैसला देने वाले सुप्रीम कोर्ट के जज न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला के खिलाफ 15 सेवानिवृत्त न्यायाधीश, 77 ब्यूरोक्रेट्स और सशस्त्र बलों के 25 दिग्गजों ने खुला बयान जारी किया है। साथ ही रिटायर्ड वकीलों ने विरोध का मोर्चा खोलते हुए कॉलेजियम सिस्टम पर भी सवाल उठाये हैं।
कन्हैयालाल जी की हत्या के लिए नुपुर के बयान को जिम्मेदार बताने वालें SC जजों के विरोध में वकील उतर आएं हैं, वकीलों ने कहा! कॉलेजियम से जो भाई भतीजावाद बना है उसे ध्वस्त करनें की मांग करनी होंगी, लीगल फ्रेटरनिटी को इस पर गंभीरतापूर्वक विचार करना होंगा! pic.twitter.com/7Ezykp7ZD3
— आनन्द पाल हरदोई (@AnandPa36870420) July 5, 2022
15 सेवानिवृत्त न्यायाधीश, 77 ब्यूरोक्रेट्स और सशस्त्र बलों के 25 दिग्गजों ने अपने ओपन लेटर में लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी परदीवाल संविधान के नियमों का पालन करते हुए अपना काम करने में विफल रहे हैं और उनकी बेवजह की टिप्पणियों ने न्याय देने में उनकी ईमानदारी के संबंध में भी नागरिकों के मन में सवाल खड़े कर दिए हैं।
ओपन लेटर में कहा गया है सुप्रीम कोर्ट के दोनों नयायधीशों ने अपनी लक्ष्मण रेखा को क्रास कर दिया है इस टिप्पणी पर तत्काल संशोधन करने की भी अपील की गई है। इस ओपन लेटर पर साइन करने वालों में बॉम्बे हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज सुमित व्यास, गुजरात हाई कोर्ट के जज एस एम सोनी, राजस्थान हाई कर्ट के रिटायर्ड जज आर एस अग्रवाल , प्रशांत अग्रवाल और दिल्ली हाई कोर्ट पूर्व के जज एस एन ढींगरा शामिल हैं।
पूर्व आईएएस अधिकारी आरएस गोपालन और एस कृष्ण कुमार, राजदूत (सेवानिवृत्त) निरंजन देसाई, पूर्व डीजीपी एसपी वैद और बी एल वोहरा, लेफ्टिनेंट जनरल वी के चतुर्वेदी (सेवानिवृत्त) और एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) एसपी सिंह ने भी बयान पर हस्ताक्षर किए हैं।
दूसरी ओर रिटायर्ड वकीलों ने कहा कि कॉलेजियम से जो भाई भतीजावाद बना है उसे ध्वस्त करनें की मांग करनी होगी, लीगल फ्रेटरनिटी को इस पर गंभीरतापूर्वक विचार करना होंगा.! "इस तरह के अपमानजनक अपराध न्यायपालिका के इतिहास में कभी नहीं हुए हैं"।
गौरतलब है, कि 1 जुलाई को, सुप्रीम कोर्ट ने पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ विवादास्पद टिप्पणियों के लिए नुपुर शर्मा को जिम्मेदार मानते हुए कहा था कि उनकी "ढीली जीभ" ने "पूरे देश को आग लगा दी है" और ये "जो कुछ भी हो रहा है उसके लिए वो अकेले जिम्मेदार है" देश नहीं"।
शीर्ष अदालत ने टिप्पणी करते हुए विभिन्न राज्यों में उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को क्लब करने की नूपुर की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था और कहा था कि यह टिप्पणी नुपुर ने या तो सस्ते प्रचार, या राजनीतिक एजेंडे या कुछ नापाक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए की थी।