चारा घोटाले के डोरंडा मामले में लालू प्रसाद यादव को दोषी करार दिया गया है। मामला डोरंडा कोषागार से 139 करोड़ रुपये की अवैध निकासी से जुड़ा है। रांची में सीबीआई की विशेष अदालत ने यह फैसला सुनाया। फिलहाल सजा लंबित है। सजा तीन साल से कम होने पर लालू को यहां से जमानत मिल जाएगी।

इस मामले में सजा का ऐलान 21 फरवरी (सोमवार) को किया जाएगा। सजा तीन साल से कम होने पर लालू को यहां से जमानत मिल जाएगी। ऐसा नहीं करने पर लालू को हिरासत में लिया जाएगा। इस मामले में लालू समेत अन्य लोग भी आरोपी थे। सीबीआई की एक अदालत ने 36 अन्य को दोषी ठहराते हुए 24 को बरी कर दिया है। इस मामले में पूर्व सांसद जगदीश शर्मा और तत्कालीन पीएसी अध्यक्ष ध्रुव भगत को भी दोषी ठहराया गया है। उन्हें  तीन साल की सजा सुनाई गई है।

निचली अदालत के ट्रैक रिकॉर्ड पर नजर डालें तो लालू यादव को चारा घोटाले से जुड़े पिछले मामलों में तीन साल से ज्यादा की सजा हो चुकी है। इससे पहले लालू प्रसाद को चारा घोटाला के चार मामलों में 14 साल जेल की सजा सुनाई गई थी। सभी मामले दुमका, देवघर और चाईबासा कोषागार से जुड़े थे। सजा के साथ लालू प्रसाद को 60 लाख रुपये का जुर्माना भी भरना पड़ा था। लालू यादव फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।

लालू प्रसाद यादव की तबीयत फिलहाल ठीक नहीं है। माना जा रहा है कि सीबीआई कोर्ट इस संबंध में कुछ राहत दे सकती है। हालांकि, पिछले मामलों को देखते हुए लालू यादव को सीबीआई कोर्ट से राहत नहीं मिली थी। चारा घोटाला मामले में लालू को इससे पहले पांच से सात साल कैद की सजा सुनाई गई थी। बाद में लालू को हाईकोर्ट से राहत मिली थी।

चारा घोटाला मामला डोरंडा कोषागार से जुड़ा है। जिसमें अवैध रूप से 139 करोड़ रुपये निकालने की बात कही गई थी। चारा घोटाले के सबसे बड़े आरसी 47ए/96 मामले दरअसल 1990 से 1995 के बीच के हैं। सीबीआई की विशेष अदालत में मामले की सुनवाई चल रही थी। इस मामले में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव मुख्य आरोपी हैं। लालू यादव को पूर्व में चारा घोटाले के अलग-अलग मामलों में हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है।