भोपाल: जंगल महकमे में निज़ाम बदलने के बाद से परम्परा और लीक से अलग हटकर नए-नए कदम उठाए जा रहें हैं। इसी कड़ी में गत दिनों वन बल प्रमुख शुभ रंजन सेन के हवाले से एक निर्देश आईएफएस एसोसिएशन के व्हाट्सअप ग्रुप पर जारी कर एक और नई परिपाटी शुरू की गई है। इस निर्देश में सीसीएफ, सीएफ और डीएफओ को निर्देशित किया गया है कि जिन अदालती मुक़दमे में प्रतिवादी पीएस, हॉफ, पीसीसीएफ और सचिव हैं, उनके नाम हटवाएं।
आईएफएस एसोसिएशन के व्हाट्सअप ग्रुप से जारी हुए हॉफ के हवाले से जारी निर्देश में कहा गया है कि सभी डीएफओ सीएफ और सीसीएफ को निर्देश दिया जाता है कि वे अगले दो दिनों के भीतर अपने अधिकार क्षेत्र में लंबित सभी अदालती मामलों की समीक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि प्रमुख सचिव, हॉफ, पीसीसीएफ और सचिव/ को प्रतिवादियों की सूची से तुरंत हटा दिया जाए। यदि यह संभव न हो, तो कार्यवाहक अधिकारी (ओआईसी) को नियुक्त करें और उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दें ताकि अवमानना या अवमानना से उत्पन्न किसी भी अप्रिय स्थिति को रोका जा सके। अन्यथा सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। अब सवाल यह है कि नियमों की अनदेखी कर मनमानी बड़े अफसर करें और सीसीएफ,सीएफ -डीएफओ कानूनी पचड़े से बाहर निकाले।
क्यों जारी करना पड़े निर्देश?
वन भवन से सीसीएफ-सीएफ मुख्यालय तक चर्चा है कि रेंजर्स प्रभार मामले में तत्कालीन ACS फारेस्ट अशोक वर्णवाल और तत्कालीन एपीसीसीएफ प्रशासन -दो की कमलिका मोहन्ता हाई कोर्ट जबलपुर की अवमानना मामला झेल रहे हैं। इसके लिए व्हाट्सअप ग्रुप पर हॉफ के नए निर्देश जारी करने पड़े। मप्र कर्मचारी कांग्रेस के अध्यक्ष मुनेन्द्र सिंह ने एसीएस अशोक वर्णवाल और अन्य (एपीसीसीएफ कमलिका मोहन्ता) के खिलाफ न्यायालय की अवमानना की याचिका दायर किया। कर्मचारी नेता मुनेन्द्र सिंह का कहना है कि रेंजर्स प्रभार मामले में उच्च न्यायालय जबलपुर के निर्देश के बाद भी तत्कालीन एसीएस और एपीसीसीएफ प्रशासन मोहन्ता ने एक आदेश जारी कर प्रभार जारी करने की रोक लगा दी थी। इसलिए संघ ने उन्हें व्यक्तिगत पार्टी बनाया है।
गणेश पाण्डेय