दोउ दीन से गए पांडे न हलुआ मिला न मांडे लेकिन यहाँ चोट पांडे जी के साथ नहीं बल्कि पूरे ओबीसी वर्ग के साथ ही हो गई गुरु| सियासत ने ज्यादा देने का झुनझुना पकड़ा कर, वो पेंच फंसाया कि उफ्फ हाथ आया अधिकार भी शून्य हो गया | सियासत के आँगन में जिस पर सभी की नज़रें टिकी हैं और वो है ओबीसी वोट बैंक| लेकिन फायदा का ख्वाब दिखाकर पुरे वर्ग के साथ चोट कर डाली| बोले तो पहले कम से कम 14 फीसदी आरक्षण तो हाथ था लेकिन 35 फीसदी का पेंच ऐसा फंसा कि तय आरक्षण भी स्वाहा हो गया| उस पर ठसका और देखिए कि सियासी दल असल पर पर्दा डाल..झूठ को सेंकने में जुटे हैं| यह जाए ,वो जाए यहाँ तक कि प्रदेश में आने वाला इन्वेस्टमेंट भी जाए लेकिन...न जाए तो है...ओबीसी वोट बैंक| जिसे सभी दल,हर स्थति और कीमत पर लपकना चाहते हैं| झुमुरु घुमाया गया| स्थानीय चुनावों में 35 फीसदी ओबीसी आरक्षण का| ओबीसी को साधते साधते लड़ाई अदालत की दहलीज तक पहुँच गई| लेकिन अदालत ने सारी दलीलों को परे रखते हुये आगामी पन्द्रह दिन के भीतर चुनाव प्रक्रिया जारी करने का निर्देश दे दिए हैं| सत्ताधारी दल असहज है तो विपक्ष हाथ आए मौके को पकड़ने के लिए सरकार पर हमलावर | लार टपकना भी लाज़मी हैं| मध्य प्रदेश अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 48 प्रतिशत मतदाता अन्य पिछड़ा वर्ग है। मोटे तौर पर कहा जाए तो यह बैंक सध गया तो मानो रास्ता भी एकदम मस्त हो गया| मुद्दे की गंभीरता इसी से समझिये कि मुखिया शिव बाबु ने अपना विदेश का महत्वपूर्ण दौरा ही टाल दिया है | तर्क दिया गया कि क्योंकि सरकार एक बार फिर न्यायलय में अपना पक्ष रखना चाहती हैं| वहां विपक्ष भी मुद्दे को लेकर बैठक पर बैठक करने में जुटा है| वैसे मुद्दे को गंभीरता से समझिये तो सारी कलई सामने होगी कि कैसे सियासी दल आसानी से आम जनता को मामू बना जाते हैं| अदालत ने अपनी प्रतिक्रिया में स्पष्ट तौर पर कहा है कि भैया...राजनीतिक दलों को किसने मना किया है कि सामन्य सीटो पर ओबीसी के प्रतिनिधि को अवसर न दिया जाए लेकिन क़ानूनी तौर ट्रिपल टेस्ट के बिना आरक्षण देना संभव नहीं है| साफ़ हैं न ...आरक्षण का झुनझुना पकड़ा कर सभी सियासी दल सिर्फ और सिर्फ अपना उल्लू सीधा करने में जुटे हैं| और जो इस पहलवानी में फिलहाल ओबीसी का नुकसान हो गया ..उसका जिम्मेदार कौन ? फिलहाल नूरा कुश्ती चरम पर है| वैसे सियासत है साहब ..खोखले मुद्दों पर अधिक थिरकती है | अब भैया ऐसे में .. मतदाताओं को ही समझना और समझाना पड़ेगा कि नेता जी ...यूँ न गोल गोल घुमाओ बल्कि असल मुद्दों पर लौटकर आओ