फैक्ट चेकर और ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि जुबैर को अंतरिम जमानत दी जानी चाहिए। इतना ही नहीं, कोर्ट ने यूपी पुलिस को नोटिस भेजकर जुबैर की याचिका पर जवाब मांगा है। इससे पहले, जुबैर की जमानत याचिका को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था और उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। इसके बाद जुबेर ने राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।
जमानत अर्जी पर कोर्ट ने सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश के सीतापुर में दर्ज एक मामले में मोहम्मद जुबैर को जमानत दे दी। इस बीच जस्टिस इंदिरा बनर्जी ने यूपी सरकार और प्रशासन को नोटिस भेजकर कहा कि जुबैर को कुछ शर्तों के साथ अंतरिम जमानत दी जा रही है।
जमानत के बाद भी जुबेर अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं जा सकेंगे। साथ ही जब तक सुनवाई पूरी नहीं होगी, तब तक जुबेर सोशल मीडिया का इस्तमाल नहीं करेंगे। दूसरी ओर, तुषार मेहता ने अनुरोध किया था कि अंतरिम आदेश पर सोमवार तक के लिए रोक लगाई जाए, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया।
मोहम्मद जुबैर ने गुरुवार को कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कहा कि उनकी जान को खतरा है। याचिका में जुबैर ने धार्मिक भावनाओं के अपमान के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 13 जून को जुबैर की रिट याचिका खारिज कर दी थी।
जुबैर की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोन्साल्विस ने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ यूपी पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी से पता चलता है कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया। वकील ने आगे कहा, उनका काम समाचारों की जांच करना था और वह अभद्र भाषा के तथ्य की जांच करने की भूमिका निभा रहे थे। हम इलाहाबाद हाईकोर्ट गए लेकिन कोई राहत नहीं मिली थी।
सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने की सुनवाई-
जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस जेके माहेश्वरी की बेंच ने फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर की याचिका पर सुनवाई की। इस बीच सॉलिसिटर जनरल एसजी तुषार मेहता ने याचिका के आधार पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जुबैर पुलिस हिरासत में है। निचली अदालत द्वारा उनकी जमानत अर्जी खारिज होने से पहले ही यहां अर्जी दाखिल की जा चुकी है। जुबेर की ओर से वकील कॉलिन गोन्साल्विस ने कहा कि सभी आरोप झूठे है।