Lunar Eclips 2026: मंगलवार को चंद्र ग्रहण के कारण देशभर के बड़े धार्मिक स्थलों ने अपने पूजा के समय में बदलाव किया है। अयोध्या में राम मंदिर, वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर और मथुरा-वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर समेत राज्य के बड़े मंदिरों ने सूतक काल और ग्रहण के नियमों का पालन करते हुए नए दर्शन शेड्यूल की घोषणा की है।
धार्मिक गणना के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को लगने वाला यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा। इसका असर दोपहर 3:27 बजे से होगा। शाम 6:47 बजे तक। शास्त्रों के अनुसार, सूतक काल के दौरान मंदिरों में रेगुलर धार्मिक रस्में और दर्शन मना हैं, इसलिए कपाट बंद रखने का फैसला किया गया है।
बड़े मंदिरों का बदला हुआ समय
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी
बंद कपाट: परंपरा के अनुसार, मंदिर के कपाट सुबह 4:30 बजे बंद कर दिए गए थे।
शुद्धिकरण: ग्रहण खत्म होने के बाद 'मोक्ष' रस्में और शुद्धिकरण किया जाएगा।
दर्शन: मंदिर शाम 7:15 बजे भक्तों के लिए फिर से खुलेगा।
राम मंदिर, अयोध्या
आरती: तय समय के हिसाब से सुबह 4:30 बजे मंगला आरती और सुबह 6:30 बजे श्रृंगार आरती की गई।
बाल भोग: राम लला को सुबह 8:15 बजे 'बाल भोग' लगाया गया।
दर्शन का समय: मंदिर के दरवाज़े सुबह 9:00 बजे बंद हो गए थे। अब, शाम की आरती के बाद, भक्त रात 8:30 बजे से रात 11:00 बजे तक दर्शन कर सकेंगे।
मथुरा और वृंदावन के मंदिर
बांके बिहारी मंदिर: सुबह 5:15 बजे खुलेगा और रात 8:30 बजे बंद होगा। शाम 7:00 बजे से रात 10:00 बजे तक खुलेगा।
श्री कृष्ण जन्मभूमि- दरवाज़े सुबह 6:00 बजे बंद होंगे। मंदिर अब रात 8:00 बजे खुलेगा और रात 9:00 बजे बंद होगा।
राधा रानी मंदिर (बरसाना): शाम 7:00 बजे खुलता है और रात 9:00 बजे बंद हो जाता है।
विंध्यवासिनी मंदिर, मिर्ज़ापुर
बंद दरवाज़े: सूतक की वजह से, दरवाज़े दोपहर 3:15 बजे से रात 8:00 बजे तक बंद रहेंगे।
दर्शन: रात 8:00 बजे के बाद, भक्तों को पूजा-पाठ और आरती के बाद ही एंट्री मिलेगी।
मंगलवार शाम को, चांद सीधे पृथ्वी की छाया से गुज़रेगा, जिससे पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। सबसे अच्छी बात यह है कि ऑस्ट्रेलिया और आओटेरोआ (न्यूज़ीलैंड) इस नज़ारे को देखने के लिए सबसे अच्छी जगह हैं।
पुराण डेस्क