जैसे भगवान शिव ने सांप को अपने गले में ले लिया है। भगवान गणेश के पास जनेऊ के रूप में एक नाग है, जबकि भगवान विष्णु शेषनाग की शैया पर विश्राम करते हैं।
यही नहीं जब भगवान विष्णु ने भगवान श्रीराम और कृष्ण के रूप में अवतार लिया, तो शेषनाग ने उनके साथ क्रमशः लक्ष्मण और बलराम के रूप में अवतार लिया। इसी प्रकार सर्प का उपयोग समुद्र मंथन में रस्सी के रूप में किया जाता था।
नागपंचमी के दिन नाग पूजा को लेकर कई भ्रांतियां हैं। इसमें सांप को दूध पिलाना भी शामिल है। ज्योतिषाचार्य कहते हैं कि बंदी नाग की पूजा करना या दूध पीने के लिए मजबूर करना नाग देवता का अपमान है। धर्मशास्त्रों के मुताबिक़ पूजा का यह तरीका सर्वथा गलत है।
बेहतर होगा कि सपेरे की कैद से मुक्त करा सांप को जंगल में छोड़ दिया जाए। वैसे भी मुक्त नाग को दूध पिलाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
वहीं जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष होता है वे इस तरह से सांपों को मुक्त करेंगे, तो उनकी सभी परेशानियां दूर हो जाएंगी। नागपंचमी के दिन मंदिर में चांदी के नागों की एक जोड़ी की पूजा और अभिषेक करें। इससे नाग देवता और शिवाजी दोनों प्रसन्न होते हैं।
हम उम्मीद करते हैं, कि इस बार की नागपंचमी पर आप हमारे द्वारा साझा की गई जानकारी को ज़रूर अमल में लाएंगे और कम से कम एक नाग को तो सपेरे की कैद से ज़रूर मुक्त करवाएंगे।