25 मई से शुरु हो रहे नवतपा, 9 दिनों तक उग्र रूप में रहेंगे सूर्यदेव


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स्टोरी हाइलाइट्स

माना जाता है कि नौतपा में जितनी अधिक गर्मी पड़ेगी, मानसून उतना ही सक्रिय होगा,। इसी कारण से नौतपा को मानसून का गर्भाधान काल भी माना जाता है..!!

शनिवार, 25 मई से नवतपा शुरू हो रहा है, ये सोमवार 3 जून तक रहेगा। 25 मई को सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेगा। जिसके साथ ही नौतपा शुरू हो जाएगा और सूर्य अपने पूरे प्रभाव में आ जाएगा, जिससे और भी ज्यादा भीषण गर्मी पड़ सकती है। 

मान्यताओं में इस समय को नवतपा और रोहिणी का तपना भी कहा जाता है। माना जाता है कि नौतपा में जितनी अधिक गर्मी पड़ेगी, मानसून उतना ही सक्रिय होगा। इसी कारण से नौतपा को मानसून का गर्भाधान काल भी माना जाता है।

देश-प्रदेश में गर्मी ने लोगों के पसीने छुड़ा दिए हैं। लोग अपने घरों से निकलने में कतराने लगे हैं। वहीं नौतपा के नौ दिनों में सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी और कम हो जाएगी। जिससे गर्मी की और भी ज्यादा तपिश महसूस होगी। 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस भौगोलिक घटना को आगामी मानसून सीजन के नजरिए से भी देखा जाता है। प्रातः 3.17 पर सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेगा। जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तो नौतप शुरू हो जाता है और जैसा कि नाम से पता चलता है, सूर्य की तीव्र गर्मी 9 दिनों तक रहती है। इस बार नौतपा 2 जून तक रहेगा। यदि इन 9 दिनों के दौरान सूर्य तेज चमकता है, तो क्षेत्र में अच्छी वर्षा होती है और मौसम भी अच्छा होता है।

यदि नौतपा के पहले दिन धूप निकली तो आषाढ़ माह के शुरुआती 15 दिनों में अच्छी बारिश होने की संभावना है। यदि अगले दिन सूर्य चमकेगा तो आषाढ़ माह के उत्तरार्ध में अच्छी वर्षा होने की संभावना है। इसी क्रम में शौन, भाद्रपद और आश्विन महीनों में दोनों तरफ वर्षा ऋतु होती है, इसलिए नौतपा का बहुत महत्व है। 

रोहिणी नक्षत्र को ब्रह्मा का स्वरूप माना जाता है। जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र पर पड़ता है तो ज्योतिषी और किसान भी संवत की भविष्यवाणी करते हैं। जिस दिन वर्षा या तूफ़ान आता है उस दिन की स्थिति के अनुसार उस दिन का मूल्यांकन करके उस दिन को वर्षा रहित मान लिया जाता है। अगर बारिश हुई तो बहुत ज्यादा बारिश होगी, जो किसानों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है।

ज्योतिषाचार्य बताते हैं, कि यदि नौतपा के मध्य काल में बारिश या तूफान का संकेत मिलता है तो भविष्य में भारी बारिश और सूखे की आशंका रहती है। उन्होंने यह भी कहा कि नौतप के दौरान भगवान शिव की पूजा और जल चढ़ाने का महत्व है। इस दौरान सहस्रघट, जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक भी होता है। इसी कारण सनातन धर्म में ज्योतिष और देवी-देवताओं की भूमिका रही।