कतर ने 8 पूर्व भारतीय नौसैनिकों को रिहा किया, भारत लौटेने पर कहा मोदी की वजह से यहां पहुंच सके


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स्टोरी हाइलाइट्स

कतर की जासूसी एजेंसी के राज्य सुरक्षा ब्यूरो ने 30 अगस्त, 2022 को 8 पूर्व नौसैनिकों को गिरफ्तार किया..!!

कतर ने 8 पूर्व भारतीय नौसैनिकों को रिहा कर दिया है। जिनमें से 7 सोमवार सुबह भारत लौट आए। सभी जासूसी के आरोप में कतर में आजीवन कारावास की सजा काट रहे था। इससे पहले उन्हें मौत की सजा सुनाई गई थी।

विदेश मंत्रालय ने सोमवार (12 फरवरी) को कहा कि भारत सरकार कतर में गिरफ्तार डहरा ग्लोबल कंपनी के लिए काम करने वाले आठ भारतीयों की रिहाई का स्वागत करती है। हम उन्हें वापस लौटने की अनुमति देने के कतर के फैसले की सराहना करते हैं।
कतर की जासूसी एजेंसी के राज्य सुरक्षा ब्यूरो ने 30 अगस्त, 2022 को 8 पूर्व नौसैनिकों को गिरफ्तार किया।

दिल्ली एयरपोर्ट लौटने के बाद कुछ पूर्व नौसैनिकों ने मीडिया से बात की। एक पूर्व नौसैनिक ने कहा- पीएम मोदी के हस्तक्षेप के बिना हमारा भारत लौटना संभव नहीं था। भारत सरकार के लगातार प्रयासों के बाद ही हम वापस आ पाये। एक अन्य पूर्व नौसैनिक ने कहा- हम 18 महीने बाद भारत आ पाए। हम पीएम मोदी और भारत सरकार को उनके प्रयासों के लिए धन्यवाद देते हैं। घर वापस आकर अच्छा लग रहा है।'

ये सभी अधिकारी कतर की नौसेना को प्रशिक्षण देने वाली निजी कंपनी दहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज एंड कंसल्टेंसी के लिए काम कर रहे थे।डहरा वैश्विक रक्षा सेवाएँ प्रदान करता है। ओमान वायु सेना के सेवानिवृत्त स्क्वाड्रन लीडर खामिस अल अजामी इसके प्रमुख हैं। उन्हें भी 8 भारतीय नागरिकों के साथ गिरफ्तार किया गया था, लेकिन नवंबर में रिहा कर दिया गया।

इन सभी पूर्व नौसेना अधिकारियों को उनकी गिरफ्तारी के लगभग 14 महीने बाद 26 अक्टूबर 2023 को मौत की सजा सुनाई गई थी। 28 दिसंबर, 2023 को उनकी मौत की सज़ा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया।

कहा जा रहा है, कि यह रिहाई ऐसे समय में हुई है जब भारत और कतर ने गैस पर एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। 6 फरवरी को हुए समझौते के तहत भारत साल 2048 तक कतर से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) खरीदेगा।

भारतीय दूतावास को सबसे पहले सितंबर 2022 के मध्य में भारतीय नौसेना की गिरफ्तारी के बारे में सूचित किया गया था। उनकी पहचान कैप्टन नवतेज सिंह गिल, कैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कमांडर पूर्णेंदु तिवारी, कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा, कमांडर सुगुनाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता, कमांडर अमित नागपाल और नाविक रागेश के रूप में की गई।

30 सितंबर, 2023 को उन्हें थोड़े समय के लिए अपने परिवार के सदस्यों से टेलीफोन पर बात करने की अनुमति दी गई। गिरफ्तारी के एक महीने बाद 3 अक्टूबर 2023 को पहली बार कॉन्सुलर एक्सेस प्रदान किया गया था। इस बीच भारतीय दूतावास के एक अधिकारी को उनसे मिलने की इजाजत दी गई। 3 दिसंबर, 2023 को कतर में भारतीय राजदूत निपुल ने आठ पूर्व नौसैनिकों से मुलाकात की।

ख़बरों के मुताबिक, 8 भारतीयों पर इजरायल के लिए जासूसी करने का आरोप लगाया गया था। अल-जजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन लोगों पर कतर के पनडुब्बी प्रोजेक्ट से जुड़ी जानकारी इजराइल को मुहैया कराने का आरोप था।

क़तर ने कभी भी इन आरोपों को सार्वजनिक नहीं किया है। 30 अक्टूबर 2023 को इन नाविकों के परिवारों ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की। इसके बाद भारत ने कतर को मनाने के लिए तुर्की की मदद लेने की कोशिश की।

कतर के शाही परिवार के साथ तुर्की के अच्छे संबंध हैं, इसलिए भारत सरकार ने उनसे मध्यस्थता के लिए संपर्क किया। भारत सरकार ने भी अमेरिका से बात की, क्योंकि रणनीतिक तौर पर कतर पर अमेरिका की पकड़ मजबूत है।