NGT ने सिंगरौली-सीधी मे अडानी ग्रुप को कोल ब्लॉक आवंटन में केंद्र एवं राज्य सरकार को किया नोटिस जारी


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स्टोरी हाइलाइट्स

'अभी तक क्यों नहीं हुआ सिंगरौली-सीधी मे 'एलिफेंट कॉरिडोर अधिसूचित'..!!

भोपाल: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, नई दिल्ली की मुख्य पीठ ने शनिवार को केंद्र सरकार, राज्य सरकार एवं अडानी ग्रुप को नोटिस जारी किया है। केंद्र सरकार एवं नेशनल वाइल्डलाइफ बोर्ड से भी जवाब मांगा है कि सीधी सिंगरौली में पूर्व के हाईकोर्ट एवं NGT के पूर्व के आदेशों के पश्चात भी आज तक 'एलिफेंट कॉरिडोर' क्यों नहीं अधिसूचित हुआ।

NGT चेयरपर्सन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव एवं न्यायमूर्ति अफरोज अहमद की युगल पीठ ने पर्यावरणविद् अजय दुबे की याचिका पर यह नोटिस जारी करते हुए प्रकरण की अगली सुनवाई 22 अप्रैल 2026 निर्धारित की हैं। याचिका में कहा गया है कि अडानी कोयला ब्लॉक को सिंगरौली के अत्यंत घने जंगलों में 1500 हेक्टेयर भूमि कोयला माइनिंग हेतु आवंटित कर दी गई, जिसमे सभी नियमों को दरकिनार करते हुए पर्यावरणीय अनुमति भी प्रदान की गई है। इस याचिका में यह भी आधार लिया गया कि  जिस क्षेत्र में कोयला ब्लॉक आवंटित किया गया है, उस क्षेत्र में पूर्व से वन विभाग की साइट सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार 'एलिफेंट कॉरिडोर' पड़ता है, जिसकी 10 किलोमीटर की परिधि में किसी भी प्रकार का खनन संचालित करने की अनुमति नहीं प्रदान की जा सकती। याचिककर्ता अजय दुबे की ओर से अधीवक्ता सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता ने NGT, नई दिल्ली के समक्ष यह पक्ष रखा।

केंद्र ने की वन भूमि कोयले के उत्खनन हेतु आवंटित

केंद्र शासन द्वारा सिंगरौली क्षेत्र में वर्ष 2022 में अडानी ग्रुप की महान कोल एनर्जी एवं स्ट्रेटाटेक मिनरल्स को 1500 हेक्टेयर वन भूमि कोयले के उत्खनन हेतु आवंटित की गई थी। इस आवंटन के पश्चात अडानी ग्रुप द्वारा पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु केंद्र एवं राज्य शासन के समक्ष आवेदन दाखिल किया गया, जिस आवेदन पर एक उच्चस्तरीय समिति पूरे क्षेत्र का सर्वेक्षण एवं मुआयना करने हेतु गठित हुई।

सर्वेक्षण रिपोर्ट एवं अनुशंसाओं को किया  दरकिनार

इस उच्चस्तरीय समिति की सर्वेक्षण रिपोर्ट एवं अनुशंसाओं को दरकिनार करते हुए केंद्र सरकार द्वारा मई 2025 में अडानी ग्रुप को पर्यावरणीय स्वीकृति जारी कर दी गई, जिसमें समिति की सर्वेक्षण एवं अनुशंसाओं का कोई हवाला तक नहीं दिया गया। इसके विरुद्ध क्षेत्र में जब पेड़ों की कटाई शुरू हुई, तब पर्यावरणविद् श्री अजय दुबे द्वारा NGT का दरवाजा खटखटाया गया, जिसमें शनिवार को  सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता अजय दुबे की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट एवं NGT के पूर्व आदेशों एवं लोकसभा में प्रश्न उठने के पश्चात भी आज तक इतना महत्वपूर्ण क्षेत्र 'एलिफेंट कॉरिडोर' के रूप में केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित नहीं किया गया। स्वयं केंद्र शासन द्वारा लोकसभा मे शपथपत्र पर यह जानकारी दी गई कि सीधी-सिंगरौली में बहुत बड़ा वन क्षेत्र 'एलिफेंट कॉरिडोर' के रूप में प्रतिसूचित होने हेतु प्रस्तावित है, परंतु आज दिनांक तक उसको अधिसूचित नहीं किया गया |