एक बार फिर पीसीसीएफ मनोज अग्रवाल का पत्र विवादों की सुर्खियों में, हॉफ बोले- देखते हैं हम


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स्टोरी हाइलाइट्स

विभाग के सीनियर अधिकारियों ने अग्रवाल के पत्र को प्रशासनिक प्रोटोकॉल का उल्लंघन माना हैं, इस पर एक पीसीसीएफ स्तर के अधिकारी ने कटाक्ष किया कि जब राजा कमजोर होता है तो मंसूबदार स्वयं को स्वतंत्र घोषित कर देते हैं..!!

भोपाल: वन महकमे में पीसीसीएफ कैम्पा मनोज अग्रवाल का एक पत्र फिर विवादों की सुर्खियों में है। पत्र को लेकर विवाद इसलिए हो रहा है कि पीसीसीएफ अनुसंधान एवं विस्तार के होते हुए बलात कब्जा कर पीसीसीएफ कैम्पा मनोज अग्रवाल ने सीधे अनुसंधान एवं विस्तार के डीएफओ और वन संरक्षक को पत्र लिखकर उन्हें निर्देश दिए हैं। विभाग के सीनियर अधिकारियों ने अग्रवाल के पत्र को प्रशासनिक प्रोटोकॉल का उल्लंघन माना हैं। इस पर एक पीसीसीएफ स्तर के अधिकारी ने कटाक्ष किया कि जब राजा कमजोर होता है तो मंसूबदार स्वयं को स्वतंत्र घोषित कर देते हैं। यही वजह है कि पीसीसीएफ अग्रवाल ने पत्र की कॉपी भी वन-बल प्रमुख शुभ रंजन सेन को नहीं भेजी है।

पूर्व एक्स के ब्लू आई अफसर रहे पीसीसीएफ कैम्पा मनोज अग्रवाल ने यह पत्र 10 मार्च को लिखा है। अनुसंधान एवं विस्तार के वन संरक्षक और डीएफओ को सीधे संबोधित पत्र में निर्देश दिए हैं कि सामाजिक वानिकी वृत्त अंतर्गत रोपणियों में उपजाऊ मिटट्टी का उपयोग किया जाता है। उपजाऊ मिटट्टी के उपयोग के संबंध में यह निर्देशित किया जाता है कि आवश्यक मिटटी खेतों अथवा अन्य स्थलों से क्रय करने के स्थान पर रोपणियों के आस-पास स्थित वन क्षेत्रों में निर्मित किये गये तालाबों से आवश्यकतानुसार खुदाई कर मिटट्टी का संग्रहण किया जावे। इससे तालाबों का गहरीकरण होकर जल संरक्षण में वृद्धि होगी। दूसरा यह कि तालाबों से प्राप्त मिटट्टी अधिक उपजाऊ एवं विभिन्न रासायनिक पदार्थों से मुक्त होगी जिससे कि फंगल इन्फेक्शन की संभावना कम होगी। मिटट्टी क्रय किये जाने की तुलना में लागत कम होगी। यहां यह उल्लेख करना उचित होगा कि प्रशासनिक प्रोटोकॉल के तहत अग्रवाल को यह पत्र पीसीसीएफ अनुसंधान विस्तार को सुझाव बतौर लिखना था। चूंकि कैम्पा शाखा से करोड़ों रुपया नर्सरी में पौधे तैयार करने के लिए दिया जाता है इसलिए अग्रवाल ने अनुसंधान एवं विस्तार के अफसर को नियंत्रित करने के लिए यह पत्र लिखा है। 

पूर्व में भी उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके है

फरवरी में ही तत्कालीन वन बल प्रमुख व्ही. एन. अंबाडे ने एक निर्देश दिए हैं कि सभी बजट प्रबंधकों के कार्य निर्धारित हैं। स्वीकृत कार्य आयोजना एवं वार्षिक ऐक्श्न प्लान के अनुसार कैम्पा एवं विकास को अन्य शाखाओं के कार्यों का भी आवंटन प्राप्त होता है। वह आवंटित राशि एवं कार्य की सूची सहित कैम्पा एवं विकास द्वारा संबंधित योजना प्रबंधकों को उपलब्ध करायी जावेगी। योजना प्रबंधकों को प्राप्त कार्य सूची के अनुसार आवंटन को अपने स्तर से आवश्यकता अनुसार अधीनस्त कार्यालयों को आवंटित कर सकेगे तथा वह व्यय/कार्य की सतत् समीक्षा करेगे तथा राशि उपयोगिता की जानकारी समय-समय पर कैम्पा एवं विकास को भेजेंगे।

सीएफ और डीएफओ की पत्र को लेकर कन्फ्यूज

पीसीसीएफ कैम्पा मनोज अग्रवाल के पत्र को लेकर कंफ्यूज है। अग्रवाल के पत्र को लेकर संवाददाता ने कम से कम एक दर्जन से अधिका फील्ड के अधिकारियों से बात की। वे अग्रवाल के कोपभाजक न बने, इसलिए दबी जुबां से बताया कि वे स्वयं कंफ्यूज है। कन्फ्यूजन इस बात को लेकर हैं कि उनके नर्सरी के आसपास तालाब के गहरीकरण का कोई भी काम नहीं चल रहा है, ऐसे में वह क्या करें? इसे स्पष्ट नहीं किया गया। सीएफ और डीएफओ का यह भी कहना है कि उन्हें निर्देश पीसीसीएफ अनुसंधान की ओर से आना चाहिए था। 

इनका कहना

अग्रवाल ने जहां तक तालाब के गहरीकरण से निकलने वाली मिट्टी के उपयोग करने की बात कही है, वह तो ठीक है। जहां तक सीधे सीएफ-डीएफओ को पत्र लिखा है, उसे हम देखते हैं।

शुभ रंजन सेन, वन बल प्रमुख