रायसेन ... जिसकी किस्मत में ऊपर किला और नीचे जिला | इसके अलावा हाथ में जो तो वो है ... झुनझुना | झुनझुना जो कल तक मतदाताओं के हाथों में थमाया जाता था लेकिन अब तो 'सोमेश्वर' भी न बच सके| पंडित जी आए ... मुद्दा उठाया,आइना दिखाया और अगली कथा के लिए निकल गए| उमा बाई आई ...गरजी , अनशन का एलान किया और फिर ... जय हरी हरी राजधानी से सटे इस शहर की बदकिस्मती देखिए, यहाँ की सड़कें नाप कर बड़े बड़े नेता भोपाल से लेकर दिल्ली की सत्ता तक पहुँच गए लेकिन हासिल कुछ न हुआ| न तो विकास की धारा से जुड़ पाया और न ही अपनी आने वाले पीढ़ी के लिए कोई विरासत छोड़ सकने के काबिल बना| तो मुद्दे पर आते हैं ,भैया .. सोमेश्वर हैं| जो कण कण में| कैद,जैसा कुछ उस इश्वर के आगे ... गौण| बस ,उसकी माया है| और इन्सान उस माया को मजाक समझ खेलने लगता है| बहुत से फालोअर कहतेहैं कि पंडित जी का काम सिर्फ रायसेन के सोये हुये भक्तो को जगाना था, सो वो काम उन्होंने भली भाँती पूरा कर दिया|