भोपाल: मुख्य सत्र में उप वन महानिरीक्षक (NTCA), नई दिल्ली डॉ. वैभव सी. माथुर, द्वारा मुख्य संबोधन में बाघ संरक्षण के विभिन्न विषयों एवं बाघ मृत्यु प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा की गई। उन्होंने सभी बाघ मृत्यु के प्रकरणों में पोस्टमार्टम, फॉरेंसिक एवं अन्य वैज्ञानिक रिपोर्टों के आधार पर मामलों के त्वरित एवं पारदर्शी निराकरण पर विशेष जोर दिया। दिलचस्प पहलू यह भी है कि जब यह कार्यशाला आयोजित की जाना थी, उसके एक दिन पहले ही टाइगर की मौत हो गई थी।
यह कार्यशाला राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के निर्देशानुसार आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य मध्य प्रदेश में बाघ संरक्षण के विभिन्न आयामों पर सार्थक चर्चा करना तथा राज्य में लंबित बाघ मृत्यु प्रकरणों का शीघ्र एवं वैज्ञानिक तरीके से अंतिम निराकरण सुनिश्चित करना रहा। यह आयोजन मप्र राज्य वन्य प्राणी शाखा भोपाल, राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण भारत सरकार, दिल्ली तथा बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के संयुक्त प्रयासों से 15 अप्रैल को बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में किया गया।
कार्यशाला में डॉ. समीता राजौरा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) ने कहा कि भविष्य में ऐसे प्रकरणों के समयबद्ध निस्तारण एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति सुदृढ़ कार्यप्रणाली अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यशाला में मध्य प्रदेश राज्य के विभिन्न टाइगर रिज़र्व, वन मंडलों एवं संबंधित इकाइयों से आए अधिकारियों ने भाग लिया तथा आवश्यक दस्तावेजों के साथ बाघ मृत्यु के ऐसे प्रकरण जिसमें विभिन्न प्रयोगशालाओं से लंबित रिपोर्ट आदि की विस्तृत समीक्षा की गई। कुल 35 प्रकरणों की समीक्षा की गई।
इन बिंदुओं पर नहीं हुई चर्चा
टाइगर की बढ़ती आबादी के कारण हो रही टेरिटोरियल फाइट को रोकने पर चर्चा नहीं हुई। इस बात पर भी मंथन नहीं हो सका कि आबादी को कम करने के लिए टाइगर की शिफ्टिंग की जाए।
SIT और CEC की जांच ठंडे बस्ते में: बाघों की मौत पर बैठी एसआईटी (SIT) और सीईसी (CEC) की उच्च स्तरीय जांचों को भ्रष्ट अधिकारी पूरी तरह से डकार गए हैं। जांच और कार्रवाई रोकने का पूरा प्रयास जारी है।
बाघों पर अत्याचार और लापता शावक बेजुबान बाघों पर लाठी-डंडे चलने का खौफनाक मामला और सुरक्षित एनक्लोजर से शावक के रातों-रात लापता होने का संगीन मामला रफा-दफा कर दिया गया है।
गणेश पाण्डेय