भोपाल: अब राज्य के पुलिस थानों को किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने के बाद उसे लिखित या मौखिक रुप से बताना अनिवार्य होगा कि किस कारण से उसे गिरफ्तार किया गया है अन्यथा अवैध हिरासत माना जायेगा। इस संबंध में पुलिस मुख्यालय की अपराध अनुसंधान शाखा ने डीजीपी के अनुमोदन से सभी पुलिस इकाईयों को निर्देश जारी कर दिये हैं। निर्देश में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मिहिर राजेश शाह विरुध्द महाराष्ट्र राज्य क्रिमिनल अपील में 6 नवम्बर 2025 को दिये गये दिशा-निर्देश का भी हवाला दिया गया है तथा इसके पालन के सिलसिले में ही ये निर्देश जारी किये गये हैं।
जारी ताजा निर्देश के अनुसार, गिरफ्तारी के आधारों के बारे में गिरफ्तार व्यक्ति को सूचित करने का संवैधानिक आदेश, आईपीसी 1860 (अब बीएनएस 2023) के तहत अपराधों सहित सभी कानूनों के तहत सभी अपराधों में अनिवार्य है। गिरफ्तारी के कारणों को गिरफ्तार व्यक्ति को उसकी समझ में आने वाली भाषा में लिखित रुप से सूचित किया जाये। यदि गिरफ्तार करने वाला अधिकारी/व्यक्ति, गिरफ्तारी के समय या उसके तुरंत बाद गिरफ्तारी के आधार लिखित रुप में बताने में असतर्थ हो, तो उसे मौखिक रुप से बताया जाये। उक्त सभी आधारों को उचित समय के भीतर लिखित रुप से सूचित किया जाये और किसी भी स्थिति में मजिस्ट्रेट के समक्ष हिरासत की कार्यवाही के लिये गिरफ्तार व्यक्ति को पेश किये जाने से कम से कम दो घण्टे पहले सूचित किया जाये। इन सभी बातों का पालन न करने पर गिरफ्तारी और उसके बाद की हिरासत अवैध मानी जायेगी और व्यक्ति को रिहा करने की स्वतंत्रता होगी।
डॉ. नवीन आनंद जोशी