Ukraine-Russia Crisis: रूस और यूक्रेन के बीच की लड़ाई अब जंग में बदल गई है। इन दोनों देशों के अलावा पूरी दुनिया की नज़र अब अमेरिका पर है। लेकिन क्या आप जानते हैं यूक्रेन पर रूस के हमले के पीछे की असली वजह क्या है..! यदि नहीं तो यह सिर्फ आपके लिए ही है। ताज़ा जानकारी के अनुसार, रूस के साथ क्रीमिया है, जिसपर 2014 में रूस ने कब्जा कर लिया था। इसके अलावा, रूस के अधिकांश समर्थक यूक्रेन के डोनबास, लुहान्स्क और डोनेट्स्क में हैं। यूक्रेन के बाहर, बेलारूस और जॉर्जिया पूरी तरह से रूस के साथ हैं। इसका मतलब यह भी है कि यूक्रेन पूरी तरह से रूस से घिरा हुआ है। आइए अब उन कारणों पर गौर करें कि रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण करने का फैसला क्यों किया।

इसका सबसे बड़ा कारण यूक्रेन को नाटो में शामिल करने की अमेरिका की कवायद है। अमेरिका के प्रभुत्व वाले संगठन में 30 देश शामिल हैं, जिनमें से अधिकांश यूरोप से हैं। हालांकि, इनमें से ज्यादातर अमेरिका के पड़ोसी ही हैं। रूस पर दबाव और पुराने विवादों के चलते अमेरिका लगातार इस तरह की कवायद कर रहा है। अमेरिका पहले भी रूस पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर चुका है। हालांकि, उनकी यह रणनीति अभी तक काम नहीं आई। लेकिन अब अमेरिका संकट के समय में यूक्रेन की मदद करना चाहता है। रूस चिंतित है कि अगर यूक्रेन नाटो में शामिल हो जाता है, तो उसकी सेना और हथियार संयुक्त राज्य को आंशिक सफलता की ओर ले जा सकते हैं।
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नॉर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन -
हमले का एक और कारण यह है कि अमेरिका और पश्चिमी यूरोपीय देशों ने नॉर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन को रोक दिया है। रूस ने इस परियोजना पर अरबों डॉलर खर्च किए हैं। रूस, फ्रांस और जर्मनी यूरोपीय देशों को गैस और तेल की आपूर्ति करना चाहता है। अतीत में, पाइपलाइन की आपूर्ति यूक्रेन से की जाती थी। रूस इसके लिए यूक्रेन को हर साल लाखों डॉलर का भुगतान करता है। लेकिन रूस की नई नॉर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन का शुरू होना मतलब यूक्रेन के राजस्व को नष्ट कर देना। यह यूक्रेन के रूस से अलग होने का एक मुख्य कारण है।

तीसरा कारण यह है कि रूस नहीं चाहता कि यूक्रेन किसी भी तरह से अमेरिका के साथ जाए। इसका एक बड़ा कारण यूक्रेन के साथ रूस के भावनात्मक संबंध हैं। रूस की पहचान यूराल पर्वत भी यूक्रेन से होकर गुजरता है। अमेरिका और रूस के बीच पिछले कुछ समय से आमना-सामना चल रहा है। पिछले युद्ध की समाप्ति के बाद से ही स्थिति नहीं बदली है। दूसरी ओर, रूस की ताकत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। रूस सिर्फ अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखना चाहता है, सायद इसीलिए वह आक्रामक हो गया है।

क्या है नॉर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन :
नॉर्ड स्ट्रीम 2 गैस पाइपलाइन बाल्टिक सागर से होते हुए रूस के पश्चिमी हिस्से से उत्तरपूर्वी जर्मनी तक जाने वाली दूसरी प्राकृतिक गैस पाइपलाइन है। नॉर्ड स्ट्रीम-1 गैस पाइपलाइन साल 2011 में चालू हुई थी। नई गैस पाइपलाइन में हर साल 55 अरब घन मीटर गैस ले जाने की क्षमता होने की बात कही जा रही है। नॉर्ड स्ट्रीम-2, 1230 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन है। इसका निर्माण साल 2018 में शुरू हुआ और सितंबर 2021 में यह पूरा हो गया। हालांकि नॉर्डस्ट्रीम 2 से गैस भेजने का काम शुरू नहीं हो सका है क्योंकि उसका परिचालन लाइसेंस अटक गया है। जिससें रूस काफ़ी समय से नाराज नज़र आ रहा है।