उमा बाई अब भूखी रहेंगी... अन्न का दाना अब हलक से दूर ही रहेगा...तब तक,जब तक सोमेश्वर के दर पर लटका ताला अपना स्थान छोड़ नही देता।
पंडित जी तो खरी खरी सुनाकर चल दिए। खाली पड़े मोर्चे को सम्हालने उमा ने कदम बढ़ा दिए।वही तीखे तेवर और पुराने अंदाज में दिखी,पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती।
ऐलान किया था..11 अप्रैल को सोमेश्वर धाम पहुंच शिव का अभिषेक करेंगी। पहुंची लेकिन ताला था जो न खुला। प्रशासन ने अपनी मज़बूरी का ज़िक्र करते हुए बाहर से ही अभिषेक करने की व्यवस्था कर दी।
सियासी जमीन तालाश रही उमा को मौका मिला तो लपक लिया। घोषित कर दिया। जब ताला नही खुलेगा..अन्न का त्याग। प्रशासन सुन्न है और शासन उलझा हुआ? क्या करें? कैसे करें?
यहां उमा बाई खम ठोंक चुकी है। मुद्दा सालों पुराना है लेकिन इस बार लगता है कि उठा तो लेकिन दफन होने के लिए तो नही। वैसे उमा बाई के सियासी भविष्य की चाबी भी सोमेश्वर मंदिर के दर पर लगे ताले से होकर जा सकती है।
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आमरण अनशन पर उमा भारती, कहा जब तक ताला नहीं टूटेगा मैं भूखी रहूंगी || RAISEN SOMESHWAR TEMPLE |
एक बार वही तीखा तेवर और पुराना अंदाज देखने को मिला पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती। ऐलान हुआ.. 11 अप्रैल को सोमेश्वर धाम पहुंचेंगे और शिव का अभिषेक करेंगे. पहुंचे लेकिन वहां एक ताला था जो खुला नहीं था। प्रशासन ने उनकी मजबूरी का हवाला देते हुए बाहर से अभिषेक करने की व्यवस्था की।