भोपाल: मध्यप्रदेश में पिछले 10 वर्षों में करंट की चपेट में आकर 341 वन्यजीवों की मौत हुई, जिनमें 28 बाघ, 36 तेंदुए और 23 भालू शामिल हैं। लेकिन इन घटनाओं में 420 किसानों के खिलाफ प्रकरण दर्ज होने के बावजूद केवल 10 मामलों में ही सजा हो सकी। इन किसानों ने अपनी फसलों को बचाने के लिए खेतों के चारों तरफ करंट फैलाकर रखे थे।
सरकार ने यह जानकारी कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक अजय सिंह के सवाल के लिखित जवाब में दी। उन्होंने सरकार से पूछा कि दस साल में खेतों में अवैध करंट फैलाने से कितने वन्य प्राणियों की मौत हुई है और कितने दोषी किसानों को सजा हुई है। लिखित जवाब में बताया गया कि 25 प्रतिशत से अधिक फसल नुकसान पर ही मुआवजा दिया जाता है, जबकि कम नुकसान की भरपाई का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। जानकारी के मुताबिक, बाघ और तेंदुए के अलावा भालू 23, चीतल 9, नील गाय 27 सहित 341 अन्य वन्य प्राणियों की मौत भी खेतों में करंट फैलाकर की गई है है। 10 मामलों में दोषी किसानों को सजा हुई हैं, जबकि 320 मामले विचाराधीन है।
शहडोल में 91 वन्य प्राणियों की मौत
घटनाओं का भौगोलिक पैटर्न भी चिंता बढ़ाता है। वन क्षेत्रों से सटे जिलों में करंट से मौतों के मामले अधिक हैं। विशेष रूप से शहडोल रेंज में 10 वर्षों में 91 वन्यजीवों की मौत दर्ज की गई। वहां, बाघ 11, तेंदुए 6, भालू 13, नीलगाय छह, जंगली सुअर के अलावा 22 तोते को करंट लगाकर मारा गया। एक हाथी की मौत करंट से भी हो चुकी है। ये संकेत देता है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष वाले इलाकों में निगरानी और वैकल्पिक सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं हैं।
विशेषज्ञों का कहना है
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या का समाधान केवल कानूनी कार्रवाई से संभव नहीं। सौर बाड़, सामुदायिक फसल सुरक्षा, त्वरित मुआवजा और ग्राम स्तर पर निगरानी समितियां जैसे उपाय अधिक प्रभावी हो सकते हैं। साथ ही, जांच और अभियोजन की प्रक्रिया मजबूत किए बिना दोषसिद्धि दर बढ़ाना मुश्किल है।
गणेश पाण्डेय