अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में इजराइल और लेबनान के राजदूत स्तर की दूसरी बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच सीजफायर को तीन हफ्तों के लिए बढ़ाने का ऐलान किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि वह जल्द ही इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन को व्हाइट हाउस बुलाने की योजना बना रहे हैं।
ईरान के साथ समझौते को लेकर ट्रम्प ने कहा कि कोई भी डील तभी होगी जब वह अमेरिका के हित में होगी। उन्होंने साफ किया कि इस मामले में कोई तय समय सीमा नहीं है और वह जल्दबाजी में फैसला नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। उनके मुताबिक पारंपरिक (नॉन-न्यूक्लियर) हमलों से ही ईरान को पहले ही भारी नुकसान पहुंचाया जा चुका है, इसलिए परमाणु हथियारों की जरूरत नहीं है।
हॉर्मुज खोलने के लिए ईरान ने शर्त रखी
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि हॉर्मुज तब तक बंद रहेगा, जब तक ईरान की करीब 11 ट्रिलियन डॉलर की जमी हुई संपत्ति (फ्रोजन एसेट्स) जारी नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि अगर अगले 48 घंटों के भीतर कोई ठोस प्रस्ताव नहीं आता है, तो मौजूदा सीजफायर भी टूट सकता है। यह बयान दिखाता है कि इलाके में तनाव फिर से तेजी से बढ़ सकता है और युद्धविराम खतरे में है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की कुछ संपत्तियां विदेशों में सच में फ्रीज (जमी हुई) हैं। अलग-अलग रिपोर्ट्स के मुताबिक यह रकम लगभग 50 अरब से 100 अरब डॉलर के बीच मानी जाती है, जो अलग-अलग देशों के बैंकों में फंसी हुई है। इसकी मुख्य वजह अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा लगाए गए प्रतिबंध हैं। ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर उस पर कई सालों से आर्थिक पाबंदियां लगी हैं।
पुराण डेस्क