क्या आप जानते हो, सार्वभौम मानव धर्म का स्वरूप? धर्म क्या है? धर्म का स्वरुप क्या है? -दिनेश मालवीय

हमारे ऋषियों ने धर्म को सुख का मूल माना है.हालाकि अपने तात्विक स्वरूप में धर्म का मूलभूत स्वरूप और सिद्धांत लगभग सार्वभौम हैं, लेकिन विभिन्न सन्दर्भों और परिस्थितयों में धर्म के दो स्वरूप होते हैं- सामान्य धर्म और विशेष धर्म. भारत में धर्म शब्द का प्रयोग कर्तव्य के रूप में अधिक किया गया है. इस अर्थ में धर्म के दो प्रमुख स्वरूप बताये गये हैं- सामान्य धर्म और विशेष धर्म.