- भारत ने स्वतंत्र सार्वभौम और स्वाभिमानी जनता को लख-लख बधाई दी।
- बांग्लादेश की स्वतंत्रता से विश्व में शांति संतुलन के नए अध्याय लिखे गए।

- भारत ने विश्व की श्रेष्ठ शक्तियों में अपना स्थान बनाया।
- इंदिरा गांधी विश्व की प्रबल प्रचंड हस्तियों में जानी गई।
- भारत की तीनों सेनाओं ने विजय वाहिनी के रूप में अपना मुकाम बनाया।
- विश्व के इतिहास में कभी किसी नए राष्ट्र के जन्म के लिए ऐसा अभियान नहीं चलाया गया।
दूसरे राष्ट्रों ने किसी देश के हड़पने के लिए तो ऐसा किया लेकिन किसी को न्याय और स्वतंत्रता दिलाने के लिए ऐसा "भूतो न भविष्यति" कभी नहीं हुआ।
भगवान राम ने विभीषण को लंका का राज्य दिलाया था। भारत ने बांग्लादेश का गठन कर ठीक उसी तरह की मिसाल पेश की।
पाकिस्तान के दो राष्ट्र के सिद्धांत को तिलांजलि दे दी गई। अमेरिका और चीन बुरी तरह एक्सपोज हो गए। फ्रांस और इंग्लैंड अपनी राजनीतिक परिपक्वता को कायम रख सके। यूरोप स्वतंत्र शक्ति के रूप में अग्रसर हो गया।
बांग्लादेश के मुक्ति के साथ ही शेख मुजीबुर रहमान संसार के सबसे बड़े व्यक्तित्व बनकर सामने आए। भारत की पाकिस्तान पर जीत कई मायनों में खास थी। देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भारतीय संसद में पाकिस्तान के सरेंडर का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अब ढाका एक आजाद देश की राजधानी है और इसके साथ ही दक्षिण एशिया का नक्शा बदल गया।
एक नए और आजाद देश का जन्म हुआ। उस वक्त संसद में कार्यवाही चल रही थी।
नए बांग्लादेश के उदय के साथ ही भारत भी एक शक्तिशाली सार्वभौमिक राष्ट्र के रूप में उभरा।
16 दिसंबर 1971 को भारत की जांबाज सेना के आगे पाकिस्तान की अत्याचारी फौज ने हथियार डाल दिए। यह दूसरे महायुद्ध के बाद किसी फौज का सबसे बड़ा आत्मसमर्पण कहा गया।
लेकिन इस शौर्य गाथा का घटनाक्रम पाकिस्तान की पराजय, पराभव व भारत की महान विजय और एक नए राष्ट्र के जन्म की आधारशिला बना।