सनातन संस्कृति में विद्यमान चेतना, ज्ञान और वैज्ञानिकता की प्रतीक विक्रमादित्य वैदिक घड़ी जल्द ही अयोध्या के भव्य राम मंदिर के साथ देश के समस्त ज्योर्तिलिंगों में भी स्थापित की जाएगी। यह ऐलान मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने किया है। बता दें कि वैदिक घड़ी काशी के विश्व प्रसिद्ध ज्योर्तिलिंग बाबा विश्वधाम धाम मंदिर परिसर में स्थापित है और बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका अवलोकन किया था। वैदिक संस्कृति के इस अनूठे प्रतीक को देखकर पीएम मोदी भी भावविभोर नजर आए थे।
राम मंदिर के साथ अन्य ज्योर्तिलिंगों में वैदिक घड़ी की स्थापित किए जाने की जानकारी सीएम मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर दी। उन्होंने लिखा- हमारा सौभाग्य है कि वाराणसी स्थित बाबा विश्वनाथ जी के धाम में सम्राट विक्रमादित्य काल की वैदिक घड़ी स्थापित हुई है। यह वैदिक घड़ी सनातन संस्कृति में विद्यमान चेतना, ज्ञान और वैज्ञानिकता की प्रतीक है। अयोध्या में श्री राम मंदिर से लेकर शेष सभी ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसरों में भी वैदिक घड़ी स्थापित की जाएगी।
काशी मंदिर में सीएम ने की अर्पित
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में काशी के मंदिर प्रांगण में स्थापित की गई थी। कालगणना के केंद्र महाकाल की नगरी उज्जैन में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के स्थापना के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव जी की मंशा अनुसार सर्वप्रथम बाबा विश्वनाथ को विक्रमादित्य वैदिक घड़ी अर्पण की गई थी।
उज्जैन में भी पीएम ने किया था लोकार्पण
भारत के स्वाभिमान के पुनर्स्थापन के लिए भारतीय काल गणना पर आधारित विश्व की पहली विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की स्थापना उज्जैन में की गयी है। जिसका लोकार्पण भी प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी द्वारा 2024 में किया गया था। इस घड़ी को वैदिक काल गणना के समस्त घटकों को समवेत कर बनाया गया है। यह घड़ी सूर्योदय से परिचालित है। अत: जिस स्थान पर जो सूर्योदय का समय होता है उस स्थान की काल गणना तदनुसार दिखाई देती है। स्टेंडर्ड टाइम भी उसी से जुड़ा रहता है। इस घड़ी में वैदिक समय, लोकेशन, भारतीय स्टेंडर्ड टाइम, भारतीय पंचांग, विक्रम सम्वत मास, ग्रह स्थिति, भद्रा स्थिति, चंद्र स्थिति आदि की जानकारी समाहित है।
मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार डॉ. श्रीराम तिवारी ने बताया कि भारत ने विश्व को सूर्य और प्रकृति के अनुरूप समय-निर्धारण का अद्वितीय दृष्टिकोण प्रदान किया है। विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के माध्यम से प्रतिदिन के सूर्योदय और सूर्यास्त की सटीक गणना के साथ-साथ दिन के 30 मुहूर्तों का विस्तृत और प्रामाणिक विवरण प्राप्त होता है। विक्रमादित्य वैदिक घड़ी आधुनिकता और परंपरा के समन्वय की एक सशक्त प्रतीक है। यह न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करती है, बल्कि युवाओं को अपनी समृद्ध संस्कृति और विरासत से जुड़े रहने की प्रेरणा भी देती है।
पुराण डेस्क