फसल बीमा पर खुली कांग्रेस की कलई, शिवराज ने अन्नदाता को फिर लुभाया
मप्र के किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें सिमटी हैं| आँखों में आशाओं के लहरें हिलोरें मार रहीं हैं तो अब पूरा भरोसा है कि उनके साथ खड़ा होने वाला भी कोई है| नहीं तो डेढ़ साल की कांग्रेस सरकार ने जो दगा किया उसके चलते तो जीवन छोड़िये .. सरकार से भरोसा ही उठ गया था| उस टूटे भरोसे को कायम किया .. शिवराज सरकार ने|
हाल ही में 7,618 करोड़ रुपए से अधिक की फसल बीमा दावा राशि का वितरण किया गया| जिसका लाभ 49 लाख 85 हजार से अधिक किसानों को मिला| अन्नदाता, जो अपनी फसल चौपट होने से डरा हुआ था,उसको सहारा मिला| किसानो को अपना पुराना अनुभव आज भी कचौटता है| सत्ता में आने के लिए बेकरार कांग्रेस ने बीते विधानसभा चुनावों में कर्जमाफी का वचन दिया|
सरकार भी बन गई लेकिन खेल किया गया| भोलेभाले किसानों के भरोसे से खेला गया| कर्जमाफी की आड़ में फसल बीमा का प्रीमियम जमा ही नहीं किया गया। सरकार की इस धोखाधड़ी के कारण न तो किसान का कर्जा माफ़ हुआ और न ही उसे फसल बीमा की राशी मिली|
कांग्रेस सरकार ने खरीफ, 2018 के प्रीमियम का भुगतान नहीं किया और परिणाम ... किसानों को खरीफ 2018, रबी 2018-19 तथा खरीफ 2019 में फसल नुकसानी की क्षतिपूर्ति नही मिल सकी| उल्टते पलटते समीकरणों के बीच सरकार बदली| शिवराज फिर सत्ता में आए| किसानों की परेशानी का भान था| शपथ लेते पहले पुराने वर्षो का बकाया प्रीमियम राशि 2200 करोड़ रूपयों का भुगतान किया। परिणाम, किसानों को 3200 करोड़ रूपये की दावा राशि का भुगतान संभव हो सका। कुछ ऐसे ही, खरीफ 2018-19 और रबी 2018-19 के लिए 22 लाख किसानों को 4 हजार 688 करोड़ रूपये का भुगतान संभव हो सका। फसल बीमा योजना में शामिल किसानों की संख्या वर्ष 2002 की स्थिति में 15.23 लाख थी, जो आज बढ़कर 65 लाख से अधिक हो गयी है।
फसल बीमा योजना में वर्ष 2002 की स्थिति में मात्र 8.77 करोड़ रुपए की दावा राशि का वितरण हुआ, जबकि शिवराज सरकार ने अब तक 45 लाख 65 हजार से अधिक किसानों को फसल बीमा के रूप में 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि का भुगतान किया है।
अब ठीक है साहब ..सियासी दलों का सपना कुर्सी ही होता है लेकिन अन्नदाता से दगा करके सत्ता की सीढ़ी चढना उफ्फ, घोर पाप से कम नही