भोपाल: राज्य के विभिन्न शासकीय विभागों, निगम-मंडलों एवं विशेषत: निर्माण कार्य संपादित करने वाली संस्थाओं में ठेका श्रमिकों एवं आउटसोर्स कर्मचारियों का नियोजन संबंधित ठेकेदार अब बिना वैधानिक लायसेंस लिये नहीं करवा पायेंगे। इसके लिये राज्य की श्रमायुक्त तन्वी हुड्डा ने परिपत्र जारी किया है।
परिपत्र में कहा गया है कि कुछ प्रकरणों में पाया गया है कि प्रमुख नियोजक के रुप में पंजीयन तथा संबंधित ठेकेदारों द्वारा वैधानिक लायसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया समय पर पूर्ण नहीं हो पाती है। यह स्थिति मुख्यतया प्रक्रियात्मक जानकारी के अभाव अथवा कार्यादेश की सूचना श्रम कार्यालय को समय पर उपलब्ध न होने के कारण उत्पन्न होती है। इसलिये अब प्रत्येक प्रतिष्ठान, जहां 50 या उससे अधिक ठेका श्रमिक नियोजित हों अथवा पूर्ववर्ती 12 माह में किसी भी दिन नियोजित रहे हों, वहां प्रमुख नियोजक द्वारा संविदा श्रम विनियमन और उन्मूलन अधिनियम 1970 के तहत पंजीयन कराया जाये। कोई भी ठेकेदार, वैध लायसेंस प्राप्त किये बिना, ठेका श्रमिक नियोजित नहीं कर सकता है। पंजीयन/लायसेंस के अभाव में ठेका श्रमिक नियोजन दंडनीय होगा। विभिन्न शासकीय विभागों, निगम-मंडलों एवं विशेषत: निर्माण कार्य संपादित करने वाली संस्थायें किसी भी एजेंसी/ठेकेदार को कार्यादेश यानि वर्क आर्डर जारी करते समय सुनिश्चित करें कि संबंधित ठेकेदार के पास वैध एवं प्रभावी लायसेंस उपलब्ध हो।
प्रत्येक जारी वर्क आर्डर की प्रति संबंधित क्षेत्रीय श्रम कार्यालय को उपलब्ध कराई जाये जिससे आवश्यक मार्गदर्शन एवं समन्वय किया जा सके। श्रमिकों के हितों की प्रभावी सुरक्षा के लिये इन विधिक प्रावधानों का सुचारु रुप से पालन किया जाये।
कर्मकार कल्याण मंडल के भी कार्य करने होंगे :
श्रमायुक्त ने समस्त कार्यालय सहायक श्रमायुक्तों एवं श्रम पदाधिकारियों को ये भी निर्देश दिये हैं कि वे अपने कार्यालयीन कार्यों के साथ-साथ मप्र भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल भोपाल के कार्यों को भी संपादित करें।
डॉ. नवीन आनंद जोशी