भोपाल: मध्य प्रदेश में रेत माफिया के हौसले एक बार फिर कानून से ऊपर नजर आए। वन विभाग की टीम ने अवैध रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोकने की कोशिश की थी। इसी दौरान रेत माफिया ने वनकर्मी हरकेश गुर्जर (32 वर्ष) पर ट्रैक्टर चढ़ा दिया। माफिया ने एक वनकर्मी को ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलकर बेरहमी से मार डाला। सिर के ऊपर से ट्रॉली गुजरने के कारण मौके पर ही मौत हो गई। इसके पहले 4 अप्रैल को भी रेत माफिया ने वन विभाग की टीम पर ट्रेक्टर-ट्राली चढ़ाने का असफल प्रयास किया था।
यह घटना बुधवार तड़के करीब साढ़े पांच बजे दिमनी थाना क्षेत्र के रानपुर चौराहे की है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ट्रैक्टर-ट्रॉली सीधे हरकेश गुर्जर के सिर के ऊपर से निकल गई, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।घटना के बाद वन विभाग में भारी आक्रोश है। सूचना मिलते ही पुलिस और वरिष्ठ वन अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे।हरकेश गुर्जर मूल रूप से मुरैना जिले के जनकपुर गांव के निवासी थे। वे पहले पन्ना टाइगर रिजर्व में पदस्थ थे और करीब चार महीने पहले ही उनका तबादला मुरैना जिले में हुआ था। वर्तमान में वे अंबाह एसडीओ कार्यालय के अंतर्गत कार्यरत थे।
प्रमुख हमले (2026)
- 8 अप्रैल 2026: फॉरेस्ट कॉन्स्टेबल हरिकेश गुर्जर की ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या की गई
- अप्रैल 2026 (शुरुआत): वन विभाग की टीम पर रेत माफिया द्वारा ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश और 10 किमी तक पीछा करने की घटना
- 22 मार्च 2026: दिमनी थाना क्षेत्र के बरेथा गांव में पुलिस वाहन को टक्कर मारी गई, जिसमें कॉन्स्टेबल सुदामा रजक गंभीर रूप से घायल हो गए
- फरवरी 2026: अवैध मंडी पर कार्रवाई के दौरान वन विभाग की टीम पर पथराव
कानून का डर समाप्त हो चुका: उमंग
मध्यप्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने इस घटना की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी और अपराधियों के हौसले चरम पर हैं। उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘मुरैना में रेत माफिया द्वारा वन विभाग की टीम पर हमला कर आरक्षक हरकेश गुर्जर को ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या कर देना न केवल भयावह है, बल्कि यह साबित करता है कि प्रदेश में अपराधियो में कानून का डर समाप्त हो चुका है।’’
रेत खनन माफिया चंबल के नए डकैत बन गए
* भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने रेत खनन माफिया की तुलना चंबल के "आधुनिक डाकुओं" से की, और उनके बेहतर हथियारों और हिंसा करने में मिली छूट का हवाला दिया।
* न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता ने मध्य प्रदेश सरकार की इन माफिया समूहों के खिलाफ प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने में असमर्थता पर चिंता व्यक्त की।
* वरिष्ठ अधिवक्ता निखिल गोयल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि चंबल नदी से प्रतिदिन लगभग 1,000 ट्रक रेत का खनन किया जाता है, जो अक्सर हथियारों से लैस होकर पुलिस स्टेशनों के पास से गुजरते हैं।
गणेश पाण्डेय