Iran War Reaches Indian Ocean: जंग का छठा दिन, अमेरिका ने भारत से लौट रहे ईरानी युद्धपोत पर किया हमला


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स्टोरी हाइलाइट्स

Iran War Reaches Indian Ocean: अमेरिका ने बुधवार को भारत से लौट रहे एक ईरानी युद्धपोत कफकर देना को श्रीलंका के पास हमला कर डुबा दिया है। हमले में अब तक 87 ईरानी नौसैनिक मारे गए..!!

Iran War Reaches Indian Ocean: अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज छठा दिन है। इस बीच इजराइल ने लेबनान के त्रिपोली शहर में स्थित फिलिस्तीनी शरणार्थी कैंप पर हमला किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला बेद्दावी रिफ्यूजी कैंप में हुआ, जो उत्तरी लेबनान का सबसे बड़ा फिलिस्तीनी शरणार्थी कैंप माना जाता है।

इस बीच ईरान ने इजराइल को कड़ी चेतावनी दी है। एक ईरानी सैन्य अधिकारी ने कहा कि अगर अमेरिका और इजराइल, ईरान में सत्ता परिवर्तन की कोशिश करते हैं, तो ईरान इजराइल के डिमोना न्यूक्लियर सेंटर को निशाना बना सकता है। ईरानी न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अधिकारी ने कहा कि ऐसी किसी भी कार्रवाई की स्थिति में दक्षिणी इजराइल में स्थित इस परमाणु केंद्र पर हमला किया जा सकता है।

दूसरी ओर अमेरिका ने बुधवार को भारत से लौट रहे एक ईरानी युद्धपोत कफकर देना को श्रीलंका के पास हमला कर डुबा दिया है। हमले में अब तक 87 ईरानी नौसैनिक मारे गए हैं। यह जानकारी श्रीलंकाई सरकार ने दी है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बताया कि हिंद महासागर में अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी जहाज को टॉरपीडो से निशाना बनाकर डुबा दिया। श्रीलंका की नेवी ने 32 घायल नौसैनिकों का रेस्क्यू कर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया है।

जहाज पर लगभग 180 नौसैनिक सवार थे। लापता लोगों की तलाश के लिए सर्च और रेस्क्यू आॅपरेशन जारी है। यह ईरानी युद्धपोत पिछले महीने भारत के विशाखापट्टनम में आयोजित 2026 इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लेकर लौट रहा था। श्रीलंकाई अधिकारियों ने अल जजीरा को बताया कि बुधवार सुबह करीब 6 से 7 बजे के बीच (भारतीय समय के मुताबिक) मदद के लिए मैसेज भेजा। यह जहाज दक्षिणी श्रीलंका के गाले शहर से करीब 40 समुद्री मील (करीब 75 किलोमीटर) दूर था।

कनाडा बोला- ईरान जंग में सेना भेजने पर अभी फैसला नहीं

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि अभी यह नहीं कहा जा सकता कि कनाडा, ईरान के खिलाफ युद्ध में सेना भेजेगा या नहीं। उन्होंने कहा कि कनाडा अपने सहयोगियों के साथ खड़ा रहेगा, लेकिन जरूरत पड़ने पर सैन्य मदद देने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।