शराब घोटाले में केजरीवाल-सिसोदिया बरी, कोर्ट के फैसले के बाद फूट-फूटकर रोए केजरीवाल


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स्टोरी हाइलाइट्स

CBI केस में केजरीवाल और सिसौदिया बरी,कोर्ट बोला- चार्जशीट में खामियां, फैसले के बाद केजरीवाल रोते हुए बोले- जिंदगीभर ईमानदारी कमाई..!!

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कथित शराब घोटाले मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बरी कर दिया है। फैसले के बाद, AAP संयोजक मीडिया के सामने आए और इसे सच्चाई की जीत बताया। इस घटना के दौरान अरविंद केजरीवाल भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू बहने लगे।

बरी होने के बाद AAP संयोजक ने कहा, "सच की जीत हुई है, और आज़ाद भारत की सबसे बड़ी पॉलिटिकल साज़िश रची गई है। हमें करप्ट कहा गया। आम आदमी पार्टी के पांच टॉप नेताओं को जेल में डाल दिया गया। अभी के चीफ़ मिनिस्टर को जेल में डालकर छह महीने तक वहीं रखा गया। ऐसा इतिहास में कभी नहीं हुआ। हमारे डिप्टी चीफ़ मिनिस्टर मनीष सिसोदिया को दो साल के लिए जेल में डाल दिया गया। हम पर कीचड़ उछाला गया। हमने अपनी ज़िंदगी में सिर्फ़ ईमानदारी कमाई है।"

उन्होंने आगे कहा, "पिछले कुछ सालों से BJP शराब स्कैम की बात कर रही थी और हम पर इल्ज़ाम लगा रही थी, लेकिन आज कोर्ट ने सारे इल्ज़ाम खारिज कर दिए हैं और सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। हमें ज्यूडिशियरी पर भरोसा है... सच की जीत हुई है... AAP को खत्म करने के लिए सभी टॉप नेताओं को जेल भेज दिया गया... यह पूरी तरह से फ़र्ज़ी केस था... केजरीवाल करप्ट नहीं है। मैंने अपनी ज़िंदगी में सिर्फ़ ईमानदारी कमाई है।" कोर्ट ने कहा है कि केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और AAP पक्के ईमानदार हैं... वे अच्छा काम करके सत्ता में आए हैं और झूठे केस करके हमें जेल भेजना प्रधानमंत्री को शोभा नहीं देता।

बता दे, कि कोर्ट ने सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया। हजारों पन्नों की चार्जशीट में कई खामियां हैं और उसमें लगाए गए आरोप किसी गवाह या बयान से साबित नहीं होते। सीबीआई सिसोदिया के खिलाफ पहली नजर में भी मामला साबित नहीं कर पाई। केजरीवाल का नाम बिना किसी ठोस सबूत के जोड़ा गया। जब मामला किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से जुड़ा हो, तब बिना पुख्ता सामग्री के आरोप लगाना कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है। किसी भी बयान या सबूत के अभाव में केजरीवाल को साजिश का हिस्सा बताना टिक नहीं सकता। चार्जशीट में ऐसी कई बातें शामिल की गईं, जिनका गवाहों के बयानों से कोई संबंध नहीं है। चार्जशीट में विरोधाभास हैं, जो कथित साजिश की पूरी थ्योरी को कमजोर करते हैं।

मुख्य आरोपी कुलदीप सिंह को बरी करते हुए जज ने कहा कि हैरानी की बात है कि उन्हें पहला आरोपी क्यों बनाया गया, जबकि उनके खिलाफ कोई ठोस सामग्री नहीं थी। सिसोदिया पर आरोप था कि वे शराब नीति बनाने और लागू करने के जिम्मेदार थे, लेकिन अदालत ने कहा कि उनके शामिल होने का कोई सबूत नहीं मिला और न ही उनके खिलाफ कोई बरामदगी हुई।