भोपाल: राज्य के लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत बनने वाले भवनों के निर्माण के दौरान उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिये नये बिन्दुओं के तहत स्टेट क्वालिटी मॉनिटरिंग दल को रिपोर्ट देनी होगी। इसके निर्देश कार्यालय प्रमुख अभियंता ने सभी भवन निर्माण मुख्य अभियंताओं एवं स्टेट क्वालिटी मॉनिटरिंग दल को जारी किये हैं।
निर्देश में कहा गया है कि यदि किसी निर्माण कार्य पर फाउण्डेशन का कार्य प्रगतिरत है तो उसमें अपने समक्ष कोर कटिंग अवश्य करवाकर उसको टेस्टिंग हेतु भेजा जाये। सभी टेस्टों की वीडियोग्राफी अवश्य कराई जाये तथा रिपोर्ट में टेस्टिंग के जिओटैग फोटोग्राफ लगाये जायें। विभागीय कार्यों में वाटरप्रूफ प्लाई की शटरिंग अनिवार्य है, इसके अतिरिक्त इसके ज्वाईंट्स को अच्छे से चेक किया जाये जिससे सीमेंट सलरी का रिसाव न हो। शटरिंग कार्यों में स्टील प्रॉप्स का ही उपयोग किया जाये तथा लकड़ी की बल्लियों का उपयोग पूर्णत: वर्जित है। मिक्सर मशीन अनिवार्यत: होपर युक्त ही प्रयोग की जाये। एक करोड़ व उससे बड़े सभी कार्यों में साइट पर प्रयोगशाला का होना अनिवार्य होगा। फ्लोरिंग में प्रयोग होने वाले मसाले में सीमेंट और रेत का अनुपात 1:4 का होना चाहिये।
किसी भी प्रोजेक्ट पर लापाटो फिनिश कोटा स्टोन का प्रयोग नहीं किया जाये। साइट पर फ्लोरी मशीन के प्रयोग की अनुमति नहीं होगी और केवल कंक्रीट प्लांट/मिक्सर का ही उपयोग किया जाये। नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एण्ड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज यानि एनएबीएल से अधिकृत प्रयोगशाला में टेस्टिंग का भुगतान निर्माण कार्य एजेंसी द्वारा नहीं किया जाकर संबंधित कार्य के कार्यपालन यंत्री से ही कराया जाये और भुगतान से संबंधित सभी दस्तावेज वहां पर उपलब्ध होने चाहिये।
डॉ. नवीन आनंद जोशी