भोपाल: प्रदेश हाई कोर्ट में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर द्वारा प्रस्तुत जवाब में विभाग ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि उमरिया जिले के वन क्षेत्र में करंट लगने से मारे गए 4 बाघों में से एक की मौत 'सोलर फेंसिंग' (सौर ऊर्जा चालित बाड़) के कारण हुई है। सुनवाई के दौरान, उच्च न्यायालय ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड निदेशक सहित वरिष्ठ अधिकारियों को बाघों की मृत्यु दर, प्रत्येक मृत्यु के कारणों और जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई 25 मार्च को है।
वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे द्वारा दायर जनहित याचिका के बाद मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, चार मौतें बिजली के झटके से हुईं, जबकि शेष चार मौतें प्राकृतिक जैविक और पारिस्थितिक कारकों के कारण हुईं। रिपोर्ट में बताया गया है कि बिजली के झटके से मरने के चार मामलों में से तीन बाघ अभयारण्य से सटे कृषि क्षेत्रों में बिछे बिजली के तारों के संपर्क में आने से मारे गए, जबकि एक बाघ सौर ऊर्जा से चलने वाली बिजली की बाड़ में फंसने से मर गया। यह स्वीकारोक्ति बेहद चौंकाने वाली है, क्योंकि सरकार स्वयं मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए सोलर फेंसिंग को एक सुरक्षित विकल्प के रूप में बढ़ावा देती रही है। सोलर फेंसिंग से निकलने वाला करंट (DC) इतना शक्तिशाली नहीं होता कि वह किसी वयस्क बाघ की जान ले सके। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या सोलर फेंसिंग के नाम पर अवैध रूप से सीधे बिजली के तारों (High Voltage AC) का उपयोग किया जा रहा था? क्या फेंसिंग के उपकरणों में कोई तकनीकी खराबी थी, जिसने सुरक्षित करंट को घातक बना दिया? यदि एक शक्तिशाली बाघ की मौत सोलर फेंसिंग से हो सकती है, तो यह इंसानों और विशेषकर किसानों के लिए कितना बड़ा खतरा है?
तब तो सरकार तुरंत जांच कराए
याचिका कर्ता अजय दुबे का कहना है कि सोलर फेंसिंग से निकलने वाला करंट (DC) इतना शक्तिशाली नहीं होता कि वह किसी वयस्क बाघ की जान ले सके। यदि यह जवाब सही है, तो राज्य सरकार को तुरंत उन सभी क्षेत्रों की जांच करनी चाहिए जहां सरकारी सब्सिडी पर सोलर फेंसिंग लगाई गई है। यह केवल एक बाघ की मौत का मामला नहीं है, बल्कि एक पूरी सुरक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता का संकट है। अगर सोलर फेंसिंग मौत का कारण बन रही है, तो यह इंसानों और वन्य जीवों की 'सुरक्षा' नहीं बल्कि 'साइलेंट किलर' है। वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट दुबे ने बताया कि इस मामले को माननीय हाई कोर्ट के समक्ष दिनांक 25 मार्च को सुनवाई में प्रमुखता से रखा जाएगा।
8 टाइगरों की मौत शिकार से नहीं हुई
प्रदेश सरकार द्वारा नवंबर 2025 और 24 फरवरी 2026 के बीच बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में आठ बाघों की मौत के संबंध में प्रस्तुत की गई स्थिति रिपोर्ट में कहा गया है कि किसी भी मामले में शिकार का कोई सबूत नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, शेष चार बाघों की मौत "वन्यजीव आबादी में निहित जैविक और पारिस्थितिक कारकों के कारण हुई और यह लापरवाही या अवैध शिकार के कारण नहीं है"। इसमें कहा गया है कि बांधवगढ़ बाघ अभ्यारण्य के अंदर हुई मौतें प्राकृतिक कारणों जैसे बीमारियों, क्षेत्रीय लड़ाई और डूबने के कारण हुईं, जो जंगली जानवरों की आबादी में अपरिहार्य हैं।
ऐसे होती है करंट से मौत
करंट से हुई टाइगर्स की मौत के कारणों को समझाते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि अपने प्राकृतिक फैलाव के कारण बाघ अक्सर संरक्षित क्षेत्र से बाहर निकलकर आस-पास के खेतों में चले जाते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, “ऐसी परिस्थितियों में, किसान कभी-कभी फसलों को शाकाहारी जानवरों से बचाने के लिए, खुले खेतों में अवैध रूप से बिजली के तार छोड़ देते हैं, जो सीधे ओवरहेड ट्रांसमिशन लाइनों से जुड़े होते हैं। जब बाघ गलती से ऐसे अवैध बिजली के तारों के संपर्क में आ जाते हैं, तो उन्हें करंट लग जाता है और उनकी मृत्यु हो जाती है।” इस बात पर भी जोर दिया गया कि सीमांत राजस्व क्षेत्रों में, बाघों का फैलाव आस-पास की कृषि भूमि में हो सकता है जहां निजी व्यक्तियों द्वारा फसल संरक्षण के लिए कभी-कभी अवैध बिजली के तार लगाए जाते हैं, जिससे वन्यजीवों के लिए आकस्मिक बिजली के झटके का खतरा पैदा हो जाता है।
बिजली लाइनों का तत्काल तकनीकी ऑडिट करने के निर्देश
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड निदेशक ने विद्युत विभाग को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि संरक्षित क्षेत्र में और उसके आसपास जर्जर बिजली लाइनें बाघों और हाथियों सहित वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं। 27 जनवरी, 2026 को जारी एक आधिकारिक पत्र में, फील्ड निदेशक ने इस बात पर प्रकाश डाला कि ताला, मगधी, खितोली, पनपथा, धामोखर जैसे मुख्य और बफर जोन और आसपास के वन्यजीव गलियारों से गुजरने वाली 11 केवी और कम वोल्टेज वाली बिजली लाइनें खतरनाक रूप से खराब स्थिति में हैं। पत्र में विद्युत विभाग को निर्देश दिया गया कि वह संरक्षित क्षेत्रों और वन्यजीव गलियारों के भीतर सभी बिजली लाइनों का तत्काल तकनीकी ऑडिट करे, उचित तनाव देकर झुकी हुई लाइनों को मजबूत करे।
गणेश पाण्डेय