अमरकंटक वन परिक्षेत्र में भीषण आग से 27 हजार से ज्यादा औषधीय पौधे जलकर राख


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स्टोरी हाइलाइट्स

वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठा गंभीर सवाल..!!

भोपाल: अमरकंटक वन परिक्षेत्र के औषधीय वन में भीषण आग से 27 हजार से ज्यादा पौधे राख हो गए हैं । भीषण आग से लगभग 50 हेक्टेयर में फैला औषधीय वन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस घटना में कुटकी, शतावरी, कालमेघ, आंवला जटामांसी, गिलोय और अश्वगंधा जैसी 27,500 से अधिक दुर्लभ जड़ी-बूटियां जलकर राख हो गई हैं। यह क्षति क्षेत्र की जैव विविधता और जनजातीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के लिए एक बड़ा नुकसान है।

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आगजनी को लेकर उपस्थित चौकीदारों का कहना है कि आगजनी खरपतवार की वजह से हुई। सब कुछ आग ने बर्बाद कर दिया। इस पूरे मामले में डीएफओ डेबिड चैनप अनूपपुर आगजनी राजस्व वन में होना बता रहे हैं। जबकि वहीं मौके पर तैनात चौकीदार ने विभागीय लापरवाही की पोल खोल दी है। 

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चौकीदार का कहना है कि उन्हें अक्सर अलग-अलग जगहों पर आग बुझाने भेज दिया जाता है, जिससे इस क्षेत्र की निगरानी प्रभावित होती रही है। सबसे बड़ा खुलासा यह है कि कैम्पा फंड से 2021-22 में पौधारोपण के बाद से अब तक इन औषधीय पौधों में न तो कोई खाद डाली गई और न ही कीटनाशक दवाइयों का उपयोग किया गया है। इतना ही नहीं, पिछले एक साल से इस औषधीय वन में झाड़-झंखाड़ और सूखी घास की सफाई भी नहीं कराई गई थी। यही सूखा कचरा आग के लिए ईंधन बन गया और देखते ही देखते पूरे 50 हेक्टेयर में फैले 27,500 पौधे आग की चपेट में आकर नष्ट हो गए है।

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विभाग की लापरवाही उजागर

भंवर सिंह, वन चौकीदार का कहना है कि यह घटना न केवल वन विभाग की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करती है कि आखिर करोड़ों रुपये की योजनाओं की देखरेख इतनी ढीलाई क्यों है? जबकि इसी वन से लगा हुआ आबादी क्षेत्र है। लेकिन वन विभाग अपने कागज़ों में ही व्यस्त नजर आ रहा है। चिंताजनक तथ्य यह भी है कि फारेस्ट मैनेजमेंट के लिए प्रत्येक वन मंडलों को करोड़ों रुपए दिए जाते हैं पर इस राशि का बड़ा हिस्सा फंड बांटने वाले बड़े साहब और उनके बाबुओं की भेंट चढ़ जाता है।