रायता बनते और पेलते वक्त तो चटखारे गूंजे लेकिन जब फैला तो अचानक याद आया कि उफ्फ ..आज तो मां संतोषी का दिन है..खट्टे से  तो व्रत खंडित हो जाता है |अब धर्म और संस्कृति का परचम बुलंद कर सत्ता की मलाई चट करने वाली भाजपा को ही देख लीजिए| मिज़ान बिगड़ा तो 'गुरु पूर्णमा' याद आ गई