क्या वाकई हेंडसम बाबू और मुखिया जी के बीच खटपट है? क्या हेंडसम बाबू अपनी लकीर बड़ी करने के लिए बेकरार हैं? अन्दर के बात महाकाल जाने लेकिन तस्वीरें,घटनाक्रम अक्सर अटकलों में लपक चर्चा में छा जाते हैं| कभी मुखिया जी के सरकारी बंगले में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुंह फुला कर निकलना हो,कभी ताली बजाने पर साथी मंत्री को टुनकी मारना हो या फिर ब्राहमण समाज के कार्यक्रम में झांकी जमवाना हो| चर्चा में तो है साहब मुखिया बाबू सहित भले पूरी मप्र भाजपा मस्त है| वजह...ओबीसी आरक्षण पर बाजी मार लेना| अब भले ही आरक्षण के नाम पर ओबीसी को क्या मिला...यह बात दीगर लेकिन भैया...फिल्म तो खिंच ही गई| मुखिया बाबू से लेकर महाराजा साहब,व्हीडी भाई तक सब एक सुर में आसमान देखकर ओबीसी ओबीसी गाये जा रहें हैं लेकिन हेंडसम बाबू तनिक अलहदा तान पकडे हैं| और वो भी विपक्षी के काँधे पर सवार होकर| सुनिए और गुनिये बोले तो ब्राह्मण समाज को साधना या फिर पार्टी के बुलंद मुद्दे के समानानतर एक और मुद्दे को खड़ा कर देना| वैसे चर्चा है .. जो अक्सर उथले धरातल पाकर पनपने लगती है| लेकिन ख़ास तो यह है कि ..अटकलों को न तो हेंडसम बाबु,न मुखिया जी और न ही पार्टी वाले बाबु साहब ने कभी नकारा है| अब सच क्या और झूठ क्या ? गुणा भाग आप ही लगा लो