कोल प्रोजेक्ट पर विधानसभा में गतिरोध जारी..विपक्ष का सरकार पर आरोप, बिना मुआवज़े के अडानी को दी माइनिंग की इजाज़त


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स्टोरी हाइलाइट्स

मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सेशन के दौरान सिंगरौली कोल ब्लॉक मुआवज़े में गड़बड़ी का मुद्दा गरमा गया, विपक्ष के नेता ने अधिकारियों के परिवारों को गैर-कानूनी मुआवज़ा देने का आरोप लगाया, जिससे सदन से वॉकआउट हो गया, मंत्री का दावा है कि हर आदिवासी को ₹50 लाख दिए जाएंगे..!!

मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सेशन के नौवें दिन भी हंगामा जारी रहा। सिंगरौली ज़िले के धिरौली में एक कोल ब्लॉक के अधिग्रहण और मुआवज़े में कथित गड़बड़ियों को लेकर सदन में गरमागरम बहस हुई। विपक्ष के नेता उमंग सिंह ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए, उन्होंने आरोप लगाया कि लाखों रुपये का मुआवज़ा प्रभावित आदिवासी परिवारों के बजाय बाहरी लोगों और पुलिस अधिकारियों के परिवारों को बांटा गया। विपक्ष ने इस मुद्दे की जांच के लिए एक कमेटी की मांग करते हुए सदन से वॉकआउट किया, जिससे कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। इस बीच, राजस्व मंत्री ने हर आदिवासी परिवार को ₹50 लाख मुआवज़ा देने का वादा किया। 

विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान सिंगरौली ज़िले के धिरौली में अडानी के कोल ब्लॉक का मुद्दा उठाते हुए विपक्ष के नेता उमंग सिंह ने कहा कि ज़मीन अधिग्रहण के नाम पर बड़ा घोटाला किया गया है। कलेक्टर की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट से 12,998 परिवार प्रभावित हैं, लेकिन मुआवज़े की रकम उन तक पहुंचने के बजाय असरदार लोगों की जेब में जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरा मुआवज़ा दिए बिना ही माइनिंग का काम शुरू कर दिया गया है।

उमंग सिंघार ने अपने आरोपों से सदन में सनसनी मचा दी। उन्होंने कहा कि लोकल थाना इंचार्ज जितेंद्र भदौरिया की पत्नी को ₹15,94,990 और ट्रैफिक इंचार्ज दीपेंद्र सिंह कुशवाहा की पत्नी स्वाति सिंह को ₹14,42,482 का मुआवज़ा दिया गया।

विपक्ष ने सवाल किया कि जिन आदिवासियों की पुश्तैनी ज़मीन अधिग्रहित की गई, वे अभी भी खाली हाथ क्यों हैं और अफ़सरों के परिवारों को यह पैसा किस आधार पर मिला? कांग्रेस MLA मामले की जांच के लिए विधानसभा की स्पेशल कमेटी बनाने पर अड़े रहे। स्पीकर ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया, लेकिन विपक्ष तुरंत कमेटी बनाने की मांग को लेकर नारे लगाता रहा। 

हंगामे के कारण कार्यवाही दो बार रोकनी पड़ी। आखिर में, सरकार के जवाब से नाखुश होकर विपक्ष सदन से वॉकआउट कर गया। वहीं सरकार का दावा है, कि हर आदिवासी परिवार को ₹50 लाख मिलेंगे।

वहीं राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि किसी भी आदिवासी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि हर प्रभावित आदिवासी परिवार को कम से कम ₹50 लाख का मुआवजा मिलेगा। मिनिस्टर ने कहा कि अगर कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो सरकार उसकी जांच करेगी, लेकिन विपक्ष के आरोप पूरी तरह सही नहीं हैं।