भगवान के Guard की Body ने दिखाया दम, आज भी इसके आगे सूरमा हैं बेदम

ये हैं अनिल गोच्छिकर,  अनिल गोच्छिकर और कोई नहीं बल्कि भगवान जगन्नाथ जी के अंगरक्षक हैं। बता दें कि जगन्नाथ पुरी मंदिर में भगवान जगन्नाथ के अंगरक्षक के तौर पर अनिल गोच्छिकर नियुक्त हैं। अपनी बाहुबली-सी कद काठी के चलते अनिल हर साल रथयात्रा में सभी का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित कर लेते हैं।

एक्टर-मॉडल की तरह स्मार्ट दिखने वाले अनिल के बारे में आपको बता दें कि वे 7 बार मिस्टर ओडिशा, 2017 एवं 2019 में राष्ट्रीय चैंपियनशिप में गोल्ड तथा 2018 में सिल्वर और एक बार अंतर्राष्ट्रीय चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम कर चुके हैं। मिस्टर ओडिशा बनने से पहले अनिल पूर्व में मिस्टर वर्ल्ड प्रतियोगिता में भी कांस्य पदक जीत चुके हैं।

अनिल के बड़े भाई भी जगन्नाथ मंदिर में सेवक हैं और माता-पिता भी महाप्रभु के सेवक थे। इसके बाद अब अनिल भी महाप्रभु की ही सेवा करते हैं। आपको बता दें की अनिल महाप्रभु की गराबड़ु सेवा अर्थात प्रभु के स्नान के लिए पानी देने का कार्य, बड़द्वार अर्थात अंगरक्षक का कार्य और हड़प सेवा यानी मंदिर ट्रेजरी वैन का दुरुपयोग न हो इसका संचालन जैसी जिम्मेदारी निभाते हैं।

अनिल हर दिन सुबह 5.30 बजे उठ जाते हैं। इसके बाद नाश्ते में 150 ग्राम अंकुरित मूंग और 1 नारियल खाने के बाद जिम जाते हैं। सुबह 9.30 बजे चावल, पनीर, मशरूम, पालक का साग, वेट प्रोटीन और फिर दोपहर 12.30 बजे चावल, पनीर, सोयाबीन, दही और सलाद खाते हैं। दोपहर 3 बजे ब्रेड या रोटी, सब्जी के साथ एक या दो केले खाते हैं और फिर जिम जाते हैं। यहां करीब 3 घंटे शारीरिक अभ्यास करते हैं।एक दिन में 4-5 लीटर दूध, ढाई किलो फल और आधा किलो चीज़ है इनकी डाइट। भगवान जगन्नाथ के अंगरक्षक अनिल, शुद्ध शाकाहारी हैं, बॉडी बनाने के लिए कभी अंडा तक नहीं खाते।

ब्राह्मण परिवार में जन्मे अनिल का कहना है कि ये एक मिथ है कि नॉनवेज से ही कसा हुआ शरीर पाया जा सकता है, मैंने अपने जीवन में कभी एक अंडा भी नहीं खाया है। शुद्ध शाकाहारी भोजन से ही बॉडी बनाई है। अनिल मंदिर में भगवान जगन्नाथ के सेवकों में से एक हैं, इन्हें भगवान का बॉडीगार्ड भी कहा जाता है। कम ही लोग जानते हैं कि भगवान जगन्नाथ की अपनी एक विशेष अंगरक्षक सेना है। प्राचीन काल में जब यहां मंदिर की स्थापना की गई थी तो भगवान की संपत्ति और परंपराओं की रक्षा के लिए एक सेना बनाई गई थी। इसे प्रतिहारी सेना कहते हैं। ये मंदिर की सारी चीजों की और भगवान की रक्षा के लिए थी। इस सेना में वर्तमान में लगभग 3000 प्रतिहारी हैं। अनिल इसी का हिस्सा हैं। उनके परिवार की कई पीढ़ियां भगवान जगन्नाथ की इसी सेवा में हैं और अपने पिता के स्थान पर इस काम में आए है।