स्नातक और स्नातकोत्तर में संकाय और विषय बदलकर प्रवेश चाहने वालों के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने अग्रणी महाविद्यालय को बनाया नोडल एजेंसी:देना होगा वॉक-इन-इंटरव्यू


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स्टोरी हाइलाइट्स

विषय परिवर्तन के लिए महाविद्यालयों के लिए नई गाइडलाइन जारी: 27 अप्रैल से अग्रणी कॉलेजों में शुरू होंगे साक्षात्कार, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय ने अधिसूचना जारी की:प्राचार्यो की बैठक में शासन की गाइडलाइन से करवाया अवगत..!!

उज्जैन: मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी की गई नई गाइडलाइन पर सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन ने स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर संकाय या विषय बदलने की इच्छा रखने वाले विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की, इसे लेकर कुलगुरु प्रो अर्पण भारद्वाज द्वारा समस्त प्राचार्यो की बैठक आयोजित कर इससे अवगत करवाया गया और इसके पालन करवाने के निर्देश दिए गए। अब मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग के नए निर्देशों के तहत, विषय बदलकर प्रवेश लेने वाले छात्रों को 'वॉक-इन-इंटरव्यू' की प्रक्रिया से गुजरना होगा।

मध्यप्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने सत्र 2026 के लिए विषय बदलकर स्नातक और स्नातकोत्तर में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, इनका प्रवेश अब वॉक-इन-इंटरव्यू परीक्षा प्रक्रिया से होगा,जिसे सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन ने अपने परिक्षेत्र के समस्त महाविद्यालयों में लागू किए जाने की अधिसूचना जारी कर दी है।

सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि,स्नातक (UG) स्तर पर कला,वाणिज्य और विज्ञान संकाय परिवर्तन करने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है और इसी तरह स्नातकोत्तर के वह विद्यार्थी जो स्नातक के अपने मूल मेजर या माइनर विषय को बदलकर किसी अन्य विषय या संकाय के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में प्रवेश लेना चाहते हैं, के लिए नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इसके तहत अब राज्य स्तरीय एकीकृत परीक्षा का आयोजन 'वॉक-इन-इंटरव्यू' (साक्षात्कार) के माध्यम से किया जाएगा, उज्जैन में अग्रणी महाविद्यालय में यह साक्षात्कार होगा। 

डॉ. शर्मा ने बताया कि, विश्वविद्यालय द्वारा उच्च शिक्षा विभाग की गाइडलाइन पर समस्त महाविद्यालयों के प्राचार्यो को जारी की गई अधिसूचना में दिशा निर्देश दिए गए हैं कि, स्नातक स्तर के विद्यार्थियों के लिए यह प्रक्रिया विशेष रूप से उन छात्र-छात्राओं के लिए है, जो कक्षा 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद स्नातक प्रथम वर्ष में अपने मूल संकाय को बदलकर किसी अन्य संकाय में प्रवेश लेना चाहते हैं। उदाहरण के लिए, यदि विज्ञान का छात्र कला या वाणिज्य में, अथवा वाणिज्य का छात्र विज्ञान या कला संकाय में जाना चाहता है, तो उसे इस साक्षात्कार में सम्मिलित होना अनिवार्य होगा।

डॉ. शर्मा ने बताया कि, इसी प्रकार स्नातकोत्तर (PG) स्तर पर प्रवेश के लिए 'राज्य स्तरीय एकीकृत परीक्षा' के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। यह प्रक्रिया उन विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य है जो स्नातक के अपने मूल मेजर या माइनर विषय को बदलकर किसी अन्य विषय या संकाय के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में प्रवेश लेना चाहते हैं।

डॉ. शर्मा ने बताया कि,निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, यह साक्षात्कार जिला स्तर पर प्रत्येक शासकीय अग्रणी महाविद्यालय में आयोजित किए जाएंगे जिन्हें उच्च शिक्षा विभाग की ओर से नोडल एजेंसी बनाया गया है, इसके अंतर्गत इच्छुक विद्यार्थी 27 अप्रैल 2026 से 14 मई 2026 के बीच सुबह 11:00 बजे से दोपहर 02:00 बजे तक अपने संबंधित जिले के अग्रणी महाविद्यालय के प्राचार्य के समक्ष उपस्थित हो सकते हैं। साक्षात्कार में सफल होने वाले विद्यार्थियों को प्राचार्य द्वारा मौके पर ही तीन प्रतियों में पात्रता प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। इस प्रमाणपत्र की एक प्रति विद्यार्थी को ई-प्रवेश पोर्टल पर अपलोड करनी होगी, जिसके आधार पर उन्हें नए संकाय में प्रवेश मिल सकेगा। यह प्रमाणपत्र तीन प्रतियों में होगा, जिसमें से एक प्रति विद्यार्थी को दी जाएगी, एक महाविद्यालय के पास रहेगी और तीसरी प्रति विश्वविद्यालय के कुलसचिव को भेजी जाएगी। 

डॉ. शर्मा ने बताया कि,विश्वविद्यालय द्वारा जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि विशेष परिस्थितियों में विद्यार्थियों को ऑनलाइन माध्यम से भी साक्षात्कार में शामिल होने की अनुमति दी जा सकती है। इसके अलावा, दूसरे राज्यों के विद्यार्थी भी मध्यप्रदेश के अपने नजदीकी अग्रणी महाविद्यालय में पहुँचकर इस प्रक्रिया का लाभ उठा सकते हैं। नियमित विद्यार्थियों के मामले में प्रवेश नियमों के पालन की जिम्मेदारी संबंधित कॉलेज के प्राचार्य की होगी। यह आदेश सम्राट् विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलसचिव द्वारा प्रदेश के सभी शासकीय व निजी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को पालन हेतु भेज दिया गया है।