कुछ दिनों से भाजपा के भीतर बड़ी ठंडक थी| वो नेता जो कुर्सी को लेकर हुल्फुलाये हुए थे| थक हार के बेचारे किनारे लग लिए थे कि अचानक फिर मौसम झनझना गया|

 
न तो आलाकमान ने कोई इशारा किया और न ही मह्त्बाकांक्षी नेताओं का बुझा सा मन झनझनाया है| बल्कि इस बार तो तूफान उठाया है एक जैन संत ने| 


जी जैन संत से सार्वजनिक मंच से वो कुछ कह दिया जिसे सुनकर शिवबाबू का बीपी उछालें मारने लगा होगा तो वही महाराजा साहब मस्त मस्त सपनों में गोते लगा रहें होंगे|

 
 ग्वालियर में चल रहे पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव का कार्यक्रम चल रहा था| केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी हाज़री लगाने पहुंचे थे| मुनिश्री विजयेश सागर और मुनि विहार्ष सागर जी आशीष मिला| इसी दौरान मुनि विज्येश सागर जी ने जो कहा वो आप भी सुन लीजिये| 


यहाँ संत ने अपनी बात ख़त्म की और वहां सिंधिया समर्थकों का जोश उबाल मार गया और जमकर जयकारे लगाना शुरू कर दिया|  चलिए मुनि जी ने किस आधार और मकसद से यह शब्द कहें, वो तो वहीँ जाने लेकिन गुरु मप्र की सियासत में अटकलों ने फिर पनपना शुरू कर दिया है| और बेशक दिलजलों को मौक़ा भी मिल गया है तो लूप लपेटा फिर शुरू