मुरैना (मध्य प्रदेश) में अवैध रेत खनन रोकने के प्रयास में वन रक्षक हरिकेश गुर्जर की ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलकर हुई हत्या का सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर संज्ञान लिया है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने एमिकस क्यूरी के आवेदन पर तत्काल सुनवाई करते हुए इस घटना को रिकॉर्ड पर लिया, मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित है।
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने क्षेत्र में अवैध रेत खनन पर चिंता व्यक्त की थी और कहा था कि रेत माफिया के खिलाफ निवारक नजरबंदी कानून लागू किया जाना चाहिए। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने रेत खनन माफिया की तुलना चंबल के "आधुनिक डाकुओं" से की, और उनके बेहतर हथियारों और हिंसा करने में मिली छूट का हवाला दिया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता ने मध्य प्रदेश सरकार की इन माफिया समूहों के खिलाफ प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने में असमर्थता पर चिंता व्यक्त की। वरिष्ठ अधिवक्ता निखिल गोयल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि चंबल नदी से प्रतिदिन लगभग 1,000 ट्रक रेत का खनन किया जाता है, जो अक्सर हथियारों से लैस होकर पुलिस स्टेशनों के पास से गुजरते हैं।
घटना और कानूनी कार्रवाई:
घटना: मुरैना में चंबल अभयारण्य क्षेत्र के पास रानपुर गांव में बुधवार (8 अप्रैल 2026) सुबह, अवैध रेत से भरे ट्रैक्टर को रोकने के दौरान वन रक्षक की हत्या।
न्यायालय का रुख: सुप्रीम कोर्ट ने चंबल में अवैध खनन के खिलाफ चल रहे स्वतः संज्ञान मामले में इस घटना को गंभीर मानते हुए सुनवाई अगले सप्ताह तय की है।
क्षेत्र की स्थिति: राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य, जो घड़ियालों का एक प्रमुख आवास है, वहाँ लंबे समय से चल रहे अवैध खनन पर पहले भी शीर्ष अदालत ने चिंता व्यक्त की है।
पिछली घटनाएं: चंबल क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में अवैध खननकर्ताओं द्वारा अधिकारियों पर हमले और हत्याओं की यह एक और दुखद घटना है।
गणेश पाण्डेय