अमेरिका ने पाक की अपील पर बढ़ाया सीजफायर, होर्मुज खुलवाने आज 30 देशों की बैठक


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स्टोरी हाइलाइट्स

होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए यूके-फ्रांस ने 30 देशों की बैठक बुलाने का फैसला किया है। लंदन में आज यह बैठक होगी, ट्रम्प ने कहा कि ईरान के अंदर इस समय नेतृत्व और सरकार में एकजुटता नहीं है, ऐसे वक्त में पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ ने उनसे ईरान पर कुछ समय तक हमले रोकने की अपील की, ताकि ईरान को साझा प्रस्ताव तैयार करने का वक्त मिल सके..!!

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका, पाकिस्तान की अपील पर ईरान के साथ चल रहे युद्धविराम (सीजफायर) को आगे बढ़ा रहा है। हालांकि उन्होंने यह नहीं कहा कि यह कितने दिन के लिए बढ़ाया गया है। वहीं होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए यूके-फ्रांस ने 30 देशों की बैठक बुलाने का फैसला किया है। लंदन में आज यह बैठक होगी।

ट्रम्प ने कहा कि ईरान के अंदर इस समय नेतृत्व और सरकार में एकजुटता नहीं है। ऐसे वक्त में पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ ने उनसे ईरान पर कुछ समय तक हमले रोकने की अपील की, ताकि ईरान को साझा प्रस्ताव तैयार करने का वक्त मिल सके।

ट्रम्प ने कहा कि इस अपील को मानते हुए उन्होंने अमेरिकी सेना को फिलहाल हमला रोकने का आदेश दिया है। हालांकि, सेना को पूरी तरह तैयार रहने को भी कहा गया है और ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिए नाकेबंदी जारी रहेगी।

उन्होंने साफ किया कि सीजफायर तब तक जारी रहेगा जब तक ईरान अपनी ओर से ठोस और एकजुट प्रस्ताव नहीं दे देता और बातचीत पूरी नहीं हो जाती, चाहे उसका नतीजा कुछ भी निकले। वहीं ईरान को चेतावनी दी कि अगर पीस डील नहीं हुई, तो अमेरिकी सेना हमले के लिए पूरी तरह तैयार है और आदेश मिलते ही कार्रवाई कर सकती है। कहा कि सीजफायर को आगे नहीं बढ़ाएंगे।

इधर  यमन के हूती विद्रोहियों ने चेतावनी दी है कि जंग अभी खत्म नहीं हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच बना सीजफायर कमजोर है। इसलिए आगे बड़ा संघर्ष होना तय है।

लिया। वहीं ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ के सलाहकार महदी मोहम्मदी ने ट्रम्प के युद्धविराम बढ़ाने के ऐलान पर सवाल उठाए हैं।

महदी मोहम्मदी ने कहा कि ट्रम्प का युद्धविराम बढ़ाना किसी काम का नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि हारने वाला पक्ष शर्तें तय नहीं कर सकता। उनके मुताबिक घेराबंदी जारी रखना भी बमबारी जैसा ही है और इसका जवाब सैन्य कार्रवाई से दिया जाना चाहिए।