वन्य प्राणी अनट्रेंड अफसरों के हाथों में प्रबंधन की कमान, अब उठने लगे सवाल


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स्टोरी हाइलाइट्स

प्रशिक्षित अफसर मुख्यालय में अटैच, कर रहें हैं बड़े बाबू जैसे काम..!!

भोपाल: मप्र में वन्यजीव प्रबंधन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। हाल ही में कान्हा में तीन शावक और उनकी मां टी-141 की मौत, पन्ना टाइगर रिजर्व के पास टाइगर का कंकाल मिलना, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व का कॉलर आईडी बाघ का छिंदवाड़ा में शिकार और बाघों के शिकार की बढ़ती घटनाओं के बाद अनट्रेंड (गैर-अनुभवी) अफसरों की नियुक्तियों पर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों और वन्यजीव प्रेमियों का आरोप है कि महत्वपूर्ण पदों पर ऐसे अधिकारियों को बैठाया जा रहा है जिनके पास वन्यजीव संरक्षण का व्यावहारिक अनुभव कम है। स्टाफ की इस भारी कमी के कारण प्रबंधन लड़खड़ा रहा है।

मप्र में जनवरी से अप्रैल के बीच 26 टाइगर, करीब 34 तेंदुआ और गत दिनों बांधवगढ़ में साढ़े पांच वर्षीय एक फीमेल हाथी की मौत हो चुकी है। संवेदनशील क्षेत्रों में बिना फील्ड अनुभव वाले अफसरों की तैनाती को मुख्य वजह माना जा रहा है। एक के  बाद एक घटनाएं हो रही है किन्तु अभी तक कोई बड़ा एक्शन नहीं हुआ। हां, एक्शन के नाम पर केवल बीट गार्ड को निलंबित कर बड़े अफसर अपने कर्तव्य की इतिश्री मान लेते हैं। ये हालात कुछ सालों में बने हैं। 

वह भी तब, जब योग्यता और दक्षता को दर-किनार कर सिफारिश और मैनेजमेंट कोटे से पोस्टिंग की परिपाटी शुरू हुई। सबसे दुर्भाग्यजनक पहलू यह है कि पन्ना टाइगर रिजर्व और संजय टाइगर रिजर्व में साल भर से फील्ड डायरेक्टर तक नहीं हैं। ये दोनों पद प्रभार में चल रहें हैं। पन्ना टाइगर रिजर्व का प्रभार वर्किंग प्लान बना रहे बृजेन्द्र श्रीवास्तव को दिया गया हैं। जबकि वन्य प्राणी एक्सपर्ट अधिकारी अनिल शुक्ला वन विकास निगम में पदस्थ हैं। शुक्ला तत्कालीन एसीएस अशोक वर्णवाल को शूट नहीं कर रहे थे। पन्ना टाइगर रिजर्व का प्रभार पहले सीसीएफ छतरपुर नरेश यादव को दिया गया था। यादव के प्रभारी कार्यकाल में डिप्टी डायरेक्टर की हैसियत से पदस्थ मोहित सूद बेहतर ढंग से वन्य प्राणी का प्रबंधन संभाल रहे थे पर वे पीसीसीएफ कैम्पा की आंखों की किरकरी बन गए। ऐसे में सूद को हटाकर नए-नए डीएफओ बने वीरेंद्र पटेल की पोस्टिंग पूर्व वन बल प्रमुख सेवानिवृत होने से पहले करवा गए। 

बांधवगढ़ की कमान भी अनट्रेंड हाथों में

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ अनुपम सहाय हैं। सहाय वन्य प्राणी डॉक्टर भी हैं। उनके सहयोग के लिए डिप्टी डायरेक्टर के पद पर वन्य प्राणी प्रबंधन में निपुण प्रकाश वर्मा की हुई। प्रकाश वर्मा को हटाकर मैनेजमेंट कोटे से योहन कटारा को फील्ड डायरेक्टर बनाया गया। राज्य वन सेवा से डीएफओ बनते ही बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का डिप्टी डायरेक्टर जैसे महत्वपूर्ण पद पोस्टिंग कर दी गई। इन्हें भी वन्य प्राणी प्रबंधन का अनुभव नहीं हैं। बांधवगढ़ के सूत्रों की माने तो कटारा अपने कार्यालय से ही प्रबंधन कर रहें हैं। जबकि वन्य प्राणी प्रशिक्षित अधिकारी डीएफओ सुजीत पाटिल वन भवन में अटैच कर रखा है।  दिलचस्प पहलू यह है कि फील्ड डायरेक्टर डॉ अनुपम सहाय इन दिनों प्रशिक्षण पर है और चार्ज वर्किंग प्लान बना रहें महेंद्र प्रताप सिंह को दिया गया। यहीं नहीं, सिंह के शहडोल सर्किल का भी प्रभार है। एक साथ तीन प्रभार होने की वजह से उनका वर्किंग प्लान लिखने का कार्य ठप्प है। वे किसी भी पद के साथ जस्टिस नहीं कर पर रहें हैं। 

संजय टाइगर का प्रभार अनुराग कुमार को देने की तैयारी

संजय टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर का पद भी छह माह से अधिक समय से रिक्त है। अभी सीसीएफ रीवा राजेश राय को प्रभार दिया गया था। राय 30 अप्रैल को सेवानिवृत होने जा रहे है। यानि रीवा सर्किल के साथ संजय टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर का पद फिर रिक्त हो जाएगा। वन्य प्राणी प्रबंधन में अनुभवी आईएफएस अंजना तिर्की को वन भवन में अटैच कर रखा है। जबकि इन्हें संजय टाइगर रिजर्व में पूर्णकालिक फील्ड डायरेक्टर बनाया जा सकता है। सूत्रों की माने तो वन्य प्राणी ट्रेंड अधिकारी की पोस्टिंग करने के बजाय मैनेजमेंट कोटे से रीवा का वर्किंग प्लान बना रहें अनुराग कुमार को रीवा सर्किल के साथ-साथ संजय टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर का प्रभार दिए जाने की फाइल मूव हो गई है। 1-2 दिन में आदेश भी जारी हो जाएंगे। छतरपुर डीएफओ में रहते अनुराग कुमार के खिलाफ वन कर्मचारियों ने कई गंभीर शिकायते की थी। तब उनकी करतूतों पर पीसीसीएफ मनोज अग्रवाल ने पर्दा डाल दिया था। 

कान्हा के हालात पर एक नजर

मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में 21 से 26 अप्रैल के बीच तीन शावकों की मौत के बाद उनकी 29 अप्रैल को मां बाधिन (टी-141) की बुधवार को मौत हो गई। प्रबंधन पहली मौत के बाद दो और मौतों को नहीं रोक पाया। 

17 अप्रैल: सरही जोन से एक वीडियो सामने आया, जिसमें एक शावक बेहद कमजोर नजर आया। वीडियो के आधार पर वन विभाग ने निगरानी हाथी गश्ती दल भी लगाया गया पर ढूढ़ नहीं पाया। 

21 अप्रैल को बड़े अमाही नाले के पास शावक का शव मिला। पोस्टमॉर्टम में उसका पेट खाली पाया गया। 

24 अप्रैल ईटावारे नाले में दूसरे शावक का शव सड़ी-गली अवस्था में मिला। इसमें भूख से मौत की बात सामने आई। लगातार दो शावकों की मौत ने बाधिन और शेष शावकों की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा दी थी।

25 अप्रैल को तीसरे शावक की भी मौत हो गई। इस बार वन विभाग ने मौत का कारण बदलते हुए फेफड़ों में संक्रमण बताया। 

29 अप्रैल : ट्रैंकुलाइज कर मुक्की क्वारंटीन सेंटर लाई गई बाघिन टी-141 और उसके चौथे शावक ने भी दम तोड़ दिया।