मध्य प्रदेश के पेंशनरों ने लिखी प्रधानमंत्री को चिट्टी, इलाज की गुहार लगाई

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स्टोरी हाइलाइट्स

सार्वजनिक संगठन और निजी उपक्रमों के पेंशनरों का मामला

भोपाल

विभागों के पेंशनर हो या सार्वजनिक संठन व निजी उपक्रमों के सभी राज्य सरकार से त्रस्त है। ईपीएस 95 के पेंशनरों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है जिसमें बताया कि है उन्हें इलाज कराने में बहुत दिक्कतें आ रही है। पेंशन 1000 से 3000 रुपये मिलने के कारण यह स्थिति है। उनकी पेंशन राशि सम्मान जनक दी जाए और उन्हें भी आयुष्मान भारत योजना के तह इलाज की सुविधा दी जाए। अभी प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है। पूर्व में राज्य के विभागों के पेंशनर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर राज्य की शिवराज सिंह चौहान की सरकार पर भेदभाव करने के आरोप लगा चुके हैं। इन पेंशनरों ने पत्र लिखा था कि उनका करोड़ों रुपये बकाया है, जो सरकार नहीं दे रही है। उनके अनेदखा किया जा रहा है। वहीं अन्य प्रदेशों की तरह मप्र में सुविधा भी नहीं दी जा रही है। पेंशनरों ने जेपी नड्डा से हस्तक्षेप करने की मांग की थी।

उल्लेखनीय है कि मप्र में सार्वजनिक संगठन व निजी उपक्रमों की संख्या एक लाख से अधिक हो गई हैं। सभी राज्यों में ये 67 लाख से अधिक है। इन्हें ईपीएस 95 के पेंशनर भी कहते हैं। ये निगम मंडल और सार्वजनिक उपक्रमों के पेंशनर है। इन पेंशनरों को नाम मात्र की पेंशन मिलती है। जिसके कारण ये उम्र के अंतिम पड़ाव में अपना ठीक से इलाज नहीं करवा पा रहे हैं इसलिए लगातार केंद्र और राज्य सरकार से नियमित सेवाओं से सेवानिवृत्त होने वाले पेंशनरों की तरह पेंशन की मांग कर रहे हैं। यह मांग अब तक पूरी नहीं हुई है।

सेवानिवृत्त अर्द्ध शासकीय अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन के अध्यक्ष अनिल बाजपेयी और महासचिव अरुण वर्मा ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। जिसमें अनुरोध किया है कि ईपीएस 95 पेंशनरों को न्यूनतम 1000 व अधिकतम 3000 रुपये पेंशन हर माह भुगतान किया जा रहा है। इतनी कम पेंशन में पेंशनर अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। महंगाई और कोरोना संक्रमण जैसे समय में बहुत मुश्किल हो रहा है। परिवार टूट रहे हैं और बढ़ापे में पेंशनर अपना इलाज तक नहीं करवा पा रहे हैं। पेंशनरों ने पत्र में न्यूनतम पेंशन में वृद्धि करने और आम नागरिकों को आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज उपलब्ध कराने की मांग की है।