मप्र को 'ग्रीन स्टेट' बनाने में लाड़ली बहना वृक्षारोपण योजना प्रारम्भ करने का आग्रह


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स्टोरी हाइलाइट्स

कार्बन क्रेडिट योजना से भी जुड़ सकती हैं लाडली बहनें..!!

भोपाल: सेवानिवृत्त आईएफएस एवं वन प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष एसपीएस तिवारी ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को लाड़ली बहना वृक्षारोपण योजना के रूप में नवाचार शुरू करने का आग्रह किया है। तिवारी ने पत्र लिखकर कहा है कि इस योजना से लाडली बहनें जहां कार्बन क्रेडिट योजना से जुड़ सकती हैं वहीं प्रदेश को 'ग्रीन स्टेट' बनाने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

तिवारी ने मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र में उल्लेख किया है कि आप लाड़ली बहना योजना के विशाल नेटवर्क का उपयोग पर्यावरण संरक्षण के लिए उपयोग कर सकतें हैं। उन्होंने कहा है कि यह अत्यंत गर्व की बात है कि वन एवं पर्यवरण, वन्य प्राणी तथा जैव विविधता के संरक्षण एवं संवर्धन मंत्रालय आपके ऊर्जावान नेतृत्व के अधीन है। मुख्य मंत्री डॉ यादव को लिखे पत्र में रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी ने सुझाव दिया कि कि प्रदेश के लाडली बहनों को 5 पौधे हर वर्ष रोपित कर उन्हें वृक्ष बनाने की जिम्मेदारी दी जाए। लगभग 1.25 करोड़ लाड़ली बहना यदि 5 पौधे प्रति वर्ष रोपित करेंगी तो एक साल में 6.25 करोड़ पौधे रोपित हो जाएंगे। यदि 5 साल तक रोपण होता रहा तो 31.25 करोड़ पौधे रोपित हो जाएंगे। अपने प्रदेश में लाखो वृक्ष विभिन्न विकास योजनाओं में काटे जा रहे हैं।

वन आवरण में वृद्धि होगी

तिवारी का मानना है कि यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू की गई तो वन आवरण में वृद्धि होगी और ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन को रोकने में काफी मदद मिलेगी। पौधों की व्यवस्था एवं तकनीकी मार्गदर्शन वन विभाग एवं उद्यानिकी विभाग को सौंपा जाए। यदि लाडली बहनों के खेत-खलिहान, आँगन बड़ी है तो वहाँ रोपित करें अन्यथा पाठशाला, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, सामुदायिक जमीन, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, थाना, पंचायत कार्यालय, रेलवे स्टेशन इत्यादि स्थानों पर पौधे रोपित कर उन्हें लाड़ली बहने गोद लें।

कार्बन क्रेडिट योजना से जुड़ सकती हैं बहनें

लाडली बहनों को कार्बन क्रेडिट योजना से भी जोड़ा जा सकता है एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली लाडली बहनों को वृक्ष सखी का प्रमाण पत्र भी देने का प्रावधान रखना चाहिए। पौधा रोपण फलदार एवं वानिकी के दीर्घ-कालिक वृक्ष का ही रोपण अनिवार्य किया जाना चाहिए।

सुझाव को प्रभावी बनाने हेतु अतिरिक्त बिंदु

 निगरानी (Geo-tagging): प्रत्येक पौधे को ऐप के माध्यम से जिओ-टैग किया जाए ताकि जीवित दर (Survival Rate) की निगरानी की जा सके।

 प्रोत्साहन: 5 साल तक जीवित रहने वाले प्रत्येक वृक्ष के लिए बहनों को अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि या प्रमाण पत्र दिया जाए।

 तकनीकी सहायता: वन विभाग द्वारा स्थानीय प्रजातियों के पौधे (जैसे- पीपल, बरगद, नीम) उपलब्ध कराए जाएं और क्षेत्र के अनुसार वृक्षारोपण की तकनीकी जानकारी दी जाए।

 यह पहल 'लाड़ली बहना' योजना को 'हरित लाड़ली' के रूप में एक नई पहचान दे सकती है। महिलाओं को 'पर्यावरण प्रहरी' के रूप में एक नई पहचान भी देगा।