भोपाल: राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति ने मप्र के बाघ आवास क्षेत्रों में तीन परियोजनाओं ग्रेटर पन्ना लैंडस्केप, संजय डबरी टाइगर रिज़र्व और रातापानी टाइगर रिज़र्व को मंजूरी दे दी है। सतना के आरक्षित वन क्षेत्र में एक चूना पत्थर खदान को मंजूरी देने की सिफारिश की।
समिति ने परियोजना प्रस्ताव के मुताबिक, पन्ना टाइगर रिज़र्व की टाइगर संरक्षण योजना के तहत स्वीकृत वन्यजीव कॉरिडोर के भीतर तथा उसके आसपास की 266.302 हेक्टेयर राजस्व भूमि पट्टे पर दी जाएगी। यह कॉरिडोर पन्ना, बांधवगढ़ और संजय टाइगर रिज़र्व के आवास क्षेत्रों को आपस में जोड़ता है। अन्य दो टाइगर रिज़र्व संजय डबरी और रातापानी में भूमिगत जल पाइपलाइन तथा बरना बांध से संबंधित ढांचागत निर्माण कार्यों को मंजूरी दी गई है। समिति ने छत्तीसगढ़ से सटे मध्य प्रदेश के मंडला ज़िले में स्थित फेन वन्यजीव अभयारण्य के ईको-सेंसिटिव ज़ोन में दो बाक्साइट खनन परियोजनाओं को भी मंजूरी की सिफारिश की है।
कॉरिडोर के निकट सुरक्षा के उपाय आवश्यक
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने कहा कि यद्यपि ये खनन पट्टे संरक्षित क्षेत्रों के कोर या बफ़र ज़ोन में नहीं आते, लेकिन फेन अभयारण्य, कान्हा टाइगर रिज़र्व और कान्हा-अचानकमार कॉरिडोर के निकट होने के कारण पारिस्थितिक सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं। अक्टूबर में 266.3 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले AAA रिसोर्स लिमिटेड के चूना पत्थर खदान पट्टे का निरीक्षण केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण, वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया और मप्र वन विभाग की समिति द्वारा किया गय। निरीक्षण में पाया गया कि खनन पट्टे का कुछ हिस्सा निर्धारित बाघ कॉरिडोर के भीतर आता है। पट्टे का दक्षिणी हिस्सा घने वनों से जुड़ा है और बाघों के आवाजाही के लिए उपयुक्त मार्ग है, जबकि उत्तरी हिस्सा खंडित है।
खनन गतिविधियों को सीमित जरुरी
परियोजना की सिफारिश करते समय समिति ने कहा कि दक्षिणी कॉरिडोर से बाघों की आवाजाही सुनिश्चित करना और उसे मज़बूत बनाना आवश्यक है। इसके लिए खनन गतिविधियों को सीमित रखना और आवाससुधार उपाय करना ज़रूरी होगा।
गणेश पाण्डेय