प्रदेश में अब लोकायुक्त नहीं नियुक्त कर सकेंगे मनरेगा लोकपाल


स्टोरी हाइलाइट्स

नये नियमों के अनुसार, मनरेगा लोकपाल की नियुक्ति दो सल के लिये की जायेगी तथा उसे प्रत्ये बैठक के लिये एक हजार रुपये परिश्रमिक दिया जायेगा तथा यह पारिश्रमिक एक माह में 20 हजार रुपये से अधिक नहीं होगा।

भोपाल।प्रदेश में अब लोकायुक्त की अनुशंसा पर मनरेगा लोकपाल नियुक्त नहीं होंगे, बल्कि इसके लिये राज्य सरकार द्वारा बनाई एक सिलेक्शन कमेटी की सिफारिश पर इनकी नियुक्ति की जायेगी। इसके लिये राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पहली बार केंद्र सरकार के मनरेगा (महात्मा गांधी नेशनल रुरल एम्प्लायमेंट गारंटी) एक्ट 2005 के तहत नये नियम बनाये हैं जो आगामी 15 जनवरी के बाद पूरे प्रदेश में प्रभावशील किये जायेंगे।

दरअसल प्रदेश के करीब सत्रह जिलों में मनरेगा लोकपाल नियुक्त हैं। लेकिन इनकी नियुक्ति केंद्र सरकार के मनरेगा नियमों के तहत लोकायुक्त की अनुशंसा पर की जा रही थी। चूंकि राज्य सरकार को इन लोकपालों की नियुक्ति के लिये अपने स्वयं के नियम बनाने थे और उसने सोलह सालों से बनाये नहीं थे, इसलिये अब जाकर ये नियम बनाये गये हैं। नये नियमों के अनुसार, अब सभी 52 जिलों में मनरेगा लोकपाल नियुक्त किये जायेंगे तथा इनकी नियुक्ति एक चयन समिति की सिफारिश पर होगी। यह चयन समिति किसी अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनाई जायेगी जिसमें केंद्रीय ग्रामीण मंत्रालय का प्रतिनिधि तथा केंद्र द्वारा नियुक्त ख्यात विशेषज्ञ सदस्य होंगे जबकि राज्य के पंचायत विभाग के प्रमुख सचिव या सचिव समिति के संयोजक बनेंगे।

नये नियमों के अनुसार, मनरेगा लोकपाल की नियुक्ति दो सल के लिये की जायेगी तथा उसे प्रत्ये बैठक के लिये एक हजार रुपये परिश्रमिक दिया जायेगा तथा यह पारिश्रमिक एक माह में 20 हजार रुपये से अधिक नहीं होगा। लोकपाल को मनरेगा में गड़बड़ी से संबंधित शिकायत की जा सकेगी। यदि लोकपाल फील्ड में जाकर जांच करना चाहता है तो उसे सरकारी वाहन की सुविधा आने-जाने के लिये दी जायेगी या स्वयं का वाहन होने पर उसके व्यय की प्रतिपूर्ति की जायेगी।