EDITORSeptember 14, 20201min16

रांगेय राघव : स्मृति दिवस —मात्र 39 की उम्र और इतना विपुल उल्लेखनीय सृजन.

रांगेय राघव : स्मृति दिवस


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मात्र 39 की उम्र और इतना विपुल उल्लेखनीय सृजन..रांगेय राघव को नमन!

असाधारण प्रतिभा के धनी रचनाकार हिन्दी के विशिष्ट और बहुमुखी प्रतिभावालों में से एक रांगेय राघव मात्र 39 वर्ष की आयु में कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, रिपोर्ताज के अतिरिक्त आलोचना, संस्कृति और सभ्यता पर कुल मिलाकर 150 से अधिक पुस्तकें गए। “कब तक पुकारु’ ’धरती मेरा घर’ जैसे चर्चित उपन्यासों के अलावा ’गदल’ जैसा अप्रतिम चरित्र भी दिया। उनकी प्रमुख प्रकाशित रचनाएँ उपन्यास: ’घरौंदा’, ’विषाद मठ’, ’मुरदों का टीला’, ’सीधा सादा रास्ता’, ’हुजूर’, ’चीवर’, ’प्रतिदान’, ’अंधेरे के जुगनू’, ’काका’, ’उबाल’, ’पराया’, ’देवकी का बेटा’, ’यशोधना जीत गई’, ’लोई का ताना’, ’रत्ना की बात’, ’भारती का सपूत’, ’आंधी की नावें’, ’अंधेरे की भूख’, ’बोलते खंडहर’, ’कब तक पुकारूँ’, ’पक्षी और आकाश’, ’बौने और घायल फूल’, ’लखिमा की आँखें, ’राई और पर्वत’, ’बंदूक और बीन’, ’राह न रुकी’, ’जब आवेगी काली घटा’, ’धूनी का धुआँ’, ’छोटी सी बात’, ’पथ का पाप’, ’मेरी भव बाधा हरो’, ’धरती मेरा घर’, ’आग की प्यास’, ’कल्पना, ’प्रोफेसर, ’दायरे’, ’पतझर’, ’आखिरी आवाज’। कहानी: ’साम्राज्य का वैभव’, ’देवदासी’, ’समुद्र के फेन, ’अधूरी मूरत’, ’जीवन के दाने’, ’अंगारे न बुझे’, ’ऐयाश मुरदे’, ’इनसान पैदा हुआ’, ’पांच गधे’, ’एक छोड़ एक’। गाथा: ’महायात्रा-१’, ’महायात्रा-२’। रिपोर्तात: ’तूफानों के बीच’। काव्य: ’अजेय खंडहर’, ’पिघलते पत्थर’, ’मेधावी’, ’राह के दीपक’, ’पांचाली’, ’रूप छाया’। नाटक: ’स्वर्णभूमि की यात्रा’, ’रामानुज’, ’विरूढ़क’। आलोचना: ’भारतीय पुनर्जागरण की भूमिका’, ’भारतीय संत परंपरा और समाज’, ’संगम और संघर्ष’, ’प्राचीन भारतीय परंपरा और इतिहास’, ’प्रगतिशील साहित्य के मानदंड’, ’समीक्षा और आदर्श’, ’काव्य, यथार्थ और प्रगति’, ’काव्य, कला और शास्त्र’, ’महाकाव्य विवेचन’, ’तुलसीदास का कला शिल्प’, ’आधुनिक हिंदी कविता में प्रेम और श्रंगार’, ’आधुनिक हिंदी कविता में विषय और शैली’, ’गोरखनाथा और उनका युग’। हिन्दी के शेक्सपियर के रूप में जाने जानेवाले व कब तक पुकारुं, धरती मेरा घर, धुनी का धुंआ, मुर्दों का टीला जैसे कालजयी उपन्यास व ’गदल’ जैसी कालजयी कहानी के यशस्वी रचनाकार रांगेय राघव कोे स्मृति दिवस पर सादर नमन!

Navneet Pandey


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