राज्यपाल ने अध्यादेश जारी कर अध्यक्ष पद की विसंगति दूर की


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स्टोरी हाइलाइट्स

यह अध्यादेश अब छह माह तक प्रभावी रहेगा तथा इसे आगे भी निरन्तर बनाये रखने के लिये राज्य सरकार को आगामी विधानसभा सत्र में विधेयक लाकर इसे पारित कराना होगा..!!

भोपाल: प्रदेश के राज्यपाल मंगु भाई पटेल ने अध्यादेश जारी कर नगर पालिकाओं एवं नगर परिषदों में पार्षदों के बीच से चुने जाने वाले अध्यक्ष के संबंध में विसंगति दूर कर दी है। यह अध्यादेश अब छह माह तक प्रभावी रहेगा तथा इसे आगे भी निरन्तर बनाये रखने के लिये राज्य सरकार को आगामी विधानसभा सत्र में विधेयक लाकर इसे पारित कराना होगा।

दरअसल, पहले राज्य निर्वाचन आयोग नगर निगमों के मेयर एवं पार्षदों तथा नगर पालिका व नगर परिषद के अध्यक्ष व पार्षदों के पद का चुनाव प्रत्यक्ष पध्दति यानि सीधे जनता के मत से कराता था और राजपत्र में इनके निर्वाचन की अधिसूचना भी जारी करता था। परन्तु वर्ष 2022 में नगर पालिका एवं नगर परिषद के अध्यक्ष पद का चुनाव अप्रत्यक्ष पध्दति यानि सीधे जनता द्वारा चुने गये पार्षदों के बीच से कराने का प्रावधान कर दिया गया। 

ऐसे में राज्य निर्वाचन आयोग सिर्फ प्रत्यक्ष पध्दति से चुने गये पार्षदों का गजट नोटिफिकेशन करता है और पार्षदों के बीच से चुने गये अध्यक्ष पद का गजट नोटिफिकेशन नहीं करता है क्योंकि नगर पालिका एवं नगर परिषद के अध्यक्ष पद का चुनाव पार्षदों के बीच से कराने का कार्य जिला कलेक्टर करते हैं।

इसी विसंगति को दूर करने के लिये उक्त अध्यादेश जारी किया गया है, जिसमें अध्यक्ष पद का नोटिफिकेशन करने का प्रावधान मप्र नगर पालिका अधिनियम 1961 से हटा दिया गया है। इसके अलावा यह भी नया प्रावधान कर दिया है कि पार्षद एवं अध्यक्ष के निर्वाचन की तिथि के बाद 30 दिन के अंदर इस निर्वाचन के विरुध्द सक्षम प्राधिकारी को याचिका प्रस्तुत की जा सकेगी।